बिहार में विशेष अभियान के दौरान टीबी के 87,623 नए मामले सामने आए

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बिहार में विशेष अभियान के दौरान टीबी के 87,623 नए मामले सामने आए

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  • Publish Date - August 20, 2026 / 09:14 PM IST,
    Updated On - August 20, 2026 / 09:14 PM IST

पटना, 20 अगस्त (भाषा) बिहार में दो जुलाई से 14 अगस्त तक चलाए गए गहन राज्यव्यापी जांच अभियान के दौरान तपेदिक (टीबी) के 87,600 से अधिक नए मामले सामने आए हैं। स्वास्थ्य विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बृहस्पतिवार को यह जानकारी दी।

राज्य के स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, अभियान के दौरान एक करोड़ लोगों की जांच के लक्ष्य के मुकाबले 2.36 करोड़ लोगों की जांच की गई।

राज्य स्वास्थ्य सोसायटी की अतिरिक्त कार्यकारी निदेशक अनुपमा सिंह ने बृहस्पतिवार को जारी एक बयान में कहा, ‘‘जांच और परीक्षण अभियान के दौरान टीबी के 87,623 से अधिक मामले सामने आए। इनमें 21,550 ऐसे लोग भी शामिल हैं, जिनमें बीमारी के कोई स्पष्ट लक्षण नहीं थे।’’

उन्होंने बताया कि यह विशेष अभियान दो जुलाई से शुरू होकर 14 अगस्त तक चला। राज्य में टीबी की पहचान और निदान के लिए स्वास्थ्य ढांचे को लगातार मजबूत किया जा रहा है।

सिंह ने बताया कि बिहार में वर्तमान में 491 डिजिटल एक्स-रे मशीनें उपलब्ध हैं, जिनमें कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) आधारित 140 पोर्टेबल हैंडहेल्ड एक्स-रे मशीनें भी शामिल हैं।

उन्होंने कहा कि राज्य के जांच नेटवर्क में 768 बाइनोकुलर माइक्रोस्कोप, 89 कार्ट्रिज आधारित न्यूक्लिक एसिड एम्प्लीफिकेशन टेस्ट (सीबीएनएएटी) मशीनें और 562 ट्रूनेट मशीनें शामिल हैं। इसके अलावा लाइन प्रोब एसे (एलपीए) और कल्चर ड्रग सेंसिटिविटी टेस्टिंग (सीडीएसटी) की प्रयोगशाला सुविधाएं भी उपलब्ध हैं।

उन्होंने कहा, ‘‘टीबी की प्राथमिकता के आधार पर पहचान के लिए 11,055 उच्च जोखिम वाले गांवों की पहचान की गई है, जबकि 24 मार्च, 2026 से अब तक 5.4 लाख से अधिक शिविर आयोजित किए जा चुके हैं।’’

सिंह ने कहा कि राज्यपाल के सहयोग और मार्गदर्शन में टीबी मुक्त पंचायतों और वार्डों के लक्ष्य को हासिल करने के लिए राजनीतिक एवं प्रशासनिक प्रतिबद्धता को मजबूत किया जा रहा है।

उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री भी नियमित रूप से कार्यक्रम की समीक्षा करते हैं, जबकि मुख्य सचिव हर सप्ताह इसकी समीक्षा कर आवश्यक दिशा-निर्देश देते हैं।

उन्होंने बताया कि अभियान के दौरान सामने आए 87,623 टीबी मरीजों में से 74,871 यानी 85 प्रतिशत मरीजों का विभेदित टीबी देखभाल के लिए आकलन किया जा चुका है।

सिंह ने कहा कि बिहार में वर्ष 2024 में टीबी उपचार की सफलता दर 88 प्रतिशत रही। वहीं, टीबी से अनुमानित मृत्यु दर वर्ष 2023 में प्रति लाख आबादी पर 21 से घटकर वर्ष 2024 में 20 रह गई।

उन्होंने बताया कि ‘टीबी मुक्त भारत अभियान’ के तहत बिहार की 547 पंचायतों ने केंद्र सरकार के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा निर्धारित सभी छह मानदंडों को पूरा करते हुए टीबी मुक्त पंचायत का दर्जा हासिल किया है।

राज्य सरकार नए संक्रमण को रोकने के लिए टीबी निवारक उपचार (टीपीटी) पर भी विशेष ध्यान दे रही है। यह पहल बिहार के सभी 38 जिलों में लागू की जा रही है।

भाषा

कैलाश शफीक रवि कांत