पटना, 19 अगस्त (भाषा) बिहार लोक सेवा आयोग (बीपीएससी) द्वारा शिक्षक भर्ती परीक्षा (टीआरई)-4 के लिए अधिसूचना जारी किए जाने के बावजूद शिक्षक पद के अभ्यर्थियों के साथ-साथ विश्वविद्यालयों के अतिथि शिक्षकों और पीएचडी धारकों ने बुधवार को यहां अपना प्रदर्शन जारी रखा ।
शिक्षक पद के अभ्यर्थियों ने मंगलवार दोपहर यहां गर्दनीबाग इलाके में प्रदर्शन करते हुए चेतावनी दी थी कि यदि टीआरई-4 की अधिसूचना जारी नहीं की गई तो वे राज्य के शिक्षा मंत्री के आवास का घेराव कर सकते हैं। इसके करीब पांच घंटे के भीतर बीपीएससी ने 32,000 से अधिक पदों पर भर्ती के लिए अधिसूचना जारी कर दी।
छात्र नेता दिलीप कुमार ने ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा, ‘‘बीपीएससी टीआरई-4, पुस्तकालयाध्यक्ष और अवर निरीक्षक (एसआई) भर्ती परीक्षाओं में एकल स्तरीय परीक्षा, भ्रष्ट तरीके से नौकरी पाने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई और बीएसएससी की भर्तियों में पारदर्शिता सुनिश्चित करने की हमारी मांगें अब भी पूरी नहीं हुई हैं। इसलिए हमारा प्रदर्शन जारी है।’’
उन्होंने कहा कि बृहस्पतिवार को सभी प्रदर्शनकारी अभ्यर्थियों के साथ विचार-विमर्श करने के बाद अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू करने पर फैसला किया जाएगा।
कुमार ने मंगलवार को चेतावनी दी थी कि यदि ‘‘तीन दिन के भीतर सभी मांगें पूरी नहीं की गईं’’ तो वह अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू करेंगे।
टीआरई-4 के प्रदर्शनकारियों के धरना स्थल से सटे स्थान पर बिहार के विभिन्न विश्वविद्यालयों के अतिथि शिक्षक और पीएचडी धारक भी दो सप्ताह से अधिक समय से प्रदर्शन कर रहे हैं। उनमें शामिल कुमुद पटेल पिछले 16 दिनों से अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठे हैं।
प्रदर्शनकारियों की प्रमुख मांगों में सहायक प्राध्यापकों की नियुक्ति में विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) के 2018 के नियमों को लागू करना, आवेदकों के लिए अधिकतम आयु सीमा बढ़ाकर 55 वर्ष करना, सहायक प्राध्यापकों की नियुक्तियों को नियमित करना और आवास नीति लागू करना शामिल है।
प्रदर्शनकारियों ने उच्च शिक्षा मंत्री संजय सिंह टाइगर और अपर मुख्य सचिव दीपक कुमार सिंह के इस्तीफे की भी मांग की। दीपक कुमार सिंह ने कुछ दिन पहले प्रदर्शनकारियों के साथ बैठक कर मामले का समाधान निकालने की कोशिश की थी।
भाषा कैलाश
राजकुमार
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