नीतीश के बाद बिहार की भाजपा सरकार पर दिल्ली में बैठे गुजरातियों का नियंत्रण होगा : प्रशांत किशोर

नीतीश के बाद बिहार की भाजपा सरकार पर दिल्ली में बैठे गुजरातियों का नियंत्रण होगा : प्रशांत किशोर

नीतीश के बाद बिहार की भाजपा सरकार पर दिल्ली में बैठे गुजरातियों का नियंत्रण होगा : प्रशांत किशोर
Modified Date: March 14, 2026 / 09:45 pm IST
Published Date: March 14, 2026 9:45 pm IST

जहानाबाद (बिहार), 14 मार्च (भाषा) जन सुराज पार्टी के संस्थापक प्रशांत किशोर ने शनिवार को दावा किया कि बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के इस्तीफे के बाद राज्य में ‘‘भाजपा की सरकार बनेगी जिसे दिल्ली में बैठे गुजरात के लोग नियंत्रित करेंगे’’।

अपनी पार्टी के पक्ष में जन समर्थन जुटाने के उद्देश्य से आयोजित ‘बिहार नवनिर्माण यात्रा’ के तहत जहानाबाद जिले की यात्रा पर आए किशोर ने संवाददाताओं के सवालों का जवाब देते हुए यह टिप्पणी की। उनकी पार्टी को कुछ महीने पहले हुए विधानसभा चुनाव में बुरी तरह हार का सामना करना पड़ा था।

नीतीश कुमार की पार्टी जनता दल-यूनाइटेड (जदयू) के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष की भूमिका भी निभा चुके किशोर ने कहा, ‘‘मैंने विधानसभा चुनाव के समय कहा था कि भले ही राजग (राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन) जीत जाए, नीतीश कुमार मुख्यमंत्री नहीं बनेंगे। मेरी भविष्यवाणी उस समय गलत साबित हुई होगी। लेकिन चार महीने से भी कम समय में नीतीश कुमार सत्ता से बाहर होने के कगार पर हैं।’’

किशोर काफी समय से आरोप लगा रहे हैं कि कुमार का मानसिक स्वास्थ्य ठीक नहीं है और इसलिए वह मुख्यमंत्री बनने के योग्य नहीं हैं।

जन सुराज पार्टी के संस्थापक ने कहा, ‘‘अब बिहार में भाजपा के नेतृत्व वाली सरकार बनेगी और यह राज्य के लिए काम नहीं करेगी क्योंकि इसे दिल्ली में बैठे गुजरात के लोग नियंत्रित करेंगे।’’

प्रशांत किशोर ने कहा कि बिहार की जनता को अब यह समझना होगा कि ‘‘उन्होंने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के खेल को न समझकर क्या गलती की है, जो यहां केवल वोट बटोरने आते हैं’’।

उन्होंने कहा, ‘‘मेरा यह भी मानना ​​है कि मतदाताओं को खुलेआम रिश्वत न दी गई होती तो राजग हालिया विधानसभा चुनाव नहीं जीत पाता।’’

उनका इशारा मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना की ओर था, जिसे विधानसभा चुनावों से ठीक पहले लागू किया गया था। योजना के तहत 1.5 करोड़ से अधिक महिलाओं को 10-10 हजार रुपये दिए गए थे। यह व्यापक रूप से माना जाता है कि इस योजना ने राजग की भारी जीत सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, जिसने बिहार विधानसभा की 243 सीटों में से 202 सीट जीतीं।

भाषा धीरज नेत्रपाल

नेत्रपाल


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