बिहार: राजभवन मार्च से एक दिन पहले तेजस्वी ने जताई ‘अत्यधिक बल प्रयोग’ की आशंका
बिहार: राजभवन मार्च से एक दिन पहले तेजस्वी ने जताई ‘अत्यधिक बल प्रयोग’ की आशंका
पटना, 18 अगस्त (भाषा) बिहार में राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (नीट) के प्रश्न पत्र लीक के खिलाफ प्रदर्शनकारियों पर पुलिस कार्रवाई के विरोध में राष्ट्रीय जनता दल (राजद) द्वारा बुधवार को निकाले जाने वाले ‘राजभवन मार्च’ से एक दिन पहले पार्टी के कार्यकारी अध्यक्ष तेजस्वी यादव ने पुलिस द्वारा ‘‘अत्यधिक बल प्रयोग’’ किए जाने की आशंका जताई।
उन्होंने मंगलवार को संवाददाता सम्मेलन में आरोप लगाया कि ‘‘छात्रों को पहले ही हिरासत में लिया जा रहा है’’ और बुधवार को मार्च में शामिल होने के लिए बड़ी संख्या में आने वाले युवाओं को ट्रेनों में सवार होने से रोका जा सकता है।
बिहार विधानसभा में विपक्ष के नेता यादव ने कहा, ‘‘हमें पता चला है कि पुलिस ने पटना में कई छात्र नेताओं को हिरासत में ले लिया है और हो सकता है कि कल (बुधवार को) बड़ी संख्या में हमारे साथ जुड़ने वाले युवाओं को ट्रेनों में सवार होने से रोक दिया जाए।’’
उन्होंने कहा, ‘‘हालांकि हमारा हौसला कम नहीं हुआ है लेकिन हमें आशंका है कि बुधवार को पुलिस अत्यधिक बल प्रयोग कर सकती है, जैसा कि उसने हाल के दिनों में छात्रों के खिलाफ किया था।’’
पूर्व उपमुख्यमंत्री ने 25 जुलाई को ‘बिहार बंद’ के दौरान सड़कों पर उतरे विद्यार्थियों के एक समूह पर सीवान जिले में एक पुलिसकर्मी द्वारा एके-47 राइफल से गोली चलाए जाने की घटना की भी जांच की मांग की।
यादव ने कहा, ‘‘सिपाही को निलंबित कर दिया गया है, लेकिन यह पर्याप्त नहीं है। यह पता लगाया जाना चाहिए कि उसे एके-47 राइफल लेकर चलने की अनुमति किसके आदेश पर मिली। ऐसे वरिष्ठ अधिकारियों के खिलाफ भी कार्रवाई होनी चाहिए।’’
वहीं, सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने यादव पर निशाना साधते हुए कहा कि ‘राजभवन मार्च’ विपक्ष के नेता के ‘‘राजनीतिक करियर को बचाने’’ के लिए आयोजित किया गया है।
भाजपा की प्रदेश इकाई के अध्यक्ष संजय सरावगी ने एक बयान में राजद प्रमुख लालू प्रसाद की सोशल मीडिया पर लोगों से ‘‘बड़ी संख्या में राजभवन मार्च में शामिल होने’’ का आग्रह करने की अपील का भी जिक्र किया।
सरावगी ने कहा, ‘‘अब यह खुला रहस्य है कि राजद के कार्यकर्ताओं और नेताओं का तेजस्वी यादव के नेतृत्व से भरोसा उठ चुका है। यही कारण है कि उनके उम्रदराज और अस्वस्थ पिता उनकी ओर से अपील कर रहे हैं। यह मार्च उत्तराधिकारी के राजनीतिक करियर को बचाने के प्रयास के अलावा कुछ नहीं है।’’
भाषा कैलाश जितेंद्र
जितेंद्र

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