बिहार चुनावः मोकामा में दो बाहुबलियों की सियासी पुनर्वास की जंग
बिहार चुनावः मोकामा में दो बाहुबलियों की सियासी पुनर्वास की जंग
(नचिकेता नारायण)
पटना, 28 अक्टूबर (भाषा) बिहार के चुनावी समर में मोकामा विधानसभा क्षेत्र में टक्कर ‘छोटे सरकार’ बनाम ‘दादा’ के बीच है। यह क्षेत्र दशकों से दोनों बाहुबलियों के बीच कड़ी प्रतिद्वंद्विता का गवाह रहा है।
जनता दल (यूनाइटेड) प्रत्याशी अनंत सिंह जिन्हें ‘छोटे सरकार’ के नाम से जाना जाता है, 2005 से लगातार इस सीट से जीत रहे थे, लेकिन 2022 में अवैध गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम के एक मामले में दोषसिद्धि के कारण उन्हें अयोग्य घोषित कर दिया गया।
इसके बाद हुए उपचुनाव में उनकी पत्नी नीलम देवी ने राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के टिकट पर इस सीट पर जीत हासिल की। दो साल पहले हुए चुनाव में सिंह भी राजद के टिकट पर ही जीते थे।
हालांकि, पटना उच्च न्यायालय द्वारा मामले में बरी किए जाने के बाद अनंत सिंह ने खुद चुनाव लड़ने का फैसला किया।
वहीं, समर्थकों के बीच ‘दादा’ के नाम से लोकप्रिय सूरजभान सिंह की पत्नी वीणा देवी राजद के टिकट पर मोकामा विधानसभा क्षेत्र से चुनाव मैदान में हैं। सिंह अयोग्य होने के कारण खुद चुनाव नहीं लड़ सकते।
सूरज भान सिंह ने 2000 में निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में मोकामा सीट से अपनी सियासी पारी शुरू की थी और इस सीट पर दिलीप सिंह को पराजित किया था। आनंद सिंह के बड़े भाई दिलीप सिंह समर्थकों के बीच ‘बड़े सरकार’ के तौर पर लोकप्रिय थे। दिलीप सिंह राजद अध्यक्ष लालू प्रसाद की पत्नी राबड़ी देवी के नेतृत्व वाली सरकार में मंत्री भी बने थे।
माना जाता है कि उस वर्ष त्रिशंकु विधानसभा चुनाव परिणाम आने के बाद नीतीश कुमार की सरकार बनाने में सूरज भान सिंह ने “सक्रिय भूमिका” निभाई और उन्हें दिवंगत राम विलास पासवान का करीबी बना दिया।
चार साल बाद (वर्ष 2004) में सूरज भान सिंह ने विधानसभा सीट छोड़ दी और रामविलास पासवान द्वारा गठित लोक जनशक्ति पार्टी (लोजपा) के टिकट पर अब अप्रचलित हो चुकी बलिया लोकसभा सीट चुनाव लड़ा और सांसद बने।
इसी दौरान अनंत सिंह ने राजनीति में उतरने का फैसला लिया और 2005 में विधानसभा चुनाव में भाग लिया। इस दौरान वह फरवरी और अक्टबूर में हुए चुनाव में जदयू उम्मीदवार के तौर पर विजयी हुए।
माना जाता है कि उन्होंने स्थानीय ताकतवर नेता के रूप में नीतीश कुमार का विश्वास जीता, जबकि जदयू के प्रमुख ने अब समाप्त हो चुकी बाढ़ लोकसभा सीट का प्रतिनिधित्व किया था, जिसमें मोकामा शामिल था।
अनंत सिंह अपने पुराने प्रतिद्वंद्वी के अपने गढ़ में वापसी करने की चुनौती को खास तवज्जों नहीं दे रहे हैं।
अनंत सिंह ने कहा, “वह (सूरज भान) हमेशा अस्थिर मानसिकता के रहे हैं। उनकी सियासी पारी देखिये, मोकामा छोड़कर बलिया के सांसद बने, फिर उनकी पत्नी (2014) मुंगेर से सांसद बनीं और पांच साल बाद उनके भाई नवादा से सांसद बन गए।”
‘बाहुबली’ शब्द पर आपत्ति जताते हुए उन्होंने दावा किया, “यह मीडिया की गढ़ी हुई परिभाषा है। मैं लोगों के आशीर्वाद और नीतीश कुमार के सुशासन के बल पर जीतूंगा।”
दूसरी ओर, लंबे अंतराल के बाद फिर से चुनावी मैदान में लौटे सूरज भान सिंह और उनके परिवार को विश्वास है कि इस बार परिवर्तन की बयार चलेगी। उनकी पत्नी वीणा देवी ने कहा, “अनंत सिंह को बात करना ही नहीं आता। ऐसे व्यक्ति से क्या उम्मीद करें कि वह सदन में क्षेत्र की समस्याओं को उठा सकेंगे? मेरे पास संसद का अनुभव है, जहां मैं सात विधानसभा क्षेत्रों की आवाज उठाती रही हूं।”
मोकामा सीट पर हमेशा भूमिहार समुदाय का प्रतिनिधि ही जीता है। लेकिन 1990 से, जब दिलीप सिंह ने अपने बल पर राजनीति करने का निर्णय लिया, तब से यह सीट एक ‘बाहुबली’ की पहचान के साथ जुड़ गई है।
मोकामा विधानसभा सीट से आठ उम्मीदवार मैदान में हैं और इस सीट पर पहले चरण में छह नवंबर को मतदान होगा।
भाषा कैलाश पवनेश
पवनेश

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