पारदर्शिता सुनिश्चित करेगी बिहार राज्य धार्मिक न्यास परिषद,पंजीकृत मंदिरों से वित्तीय ब्योरा मांगा
पारदर्शिता सुनिश्चित करेगी बिहार राज्य धार्मिक न्यास परिषद,पंजीकृत मंदिरों से वित्तीय ब्योरा मांगा
पटना, एक जुलाई (भाषा) बिहार राज्य धार्मिक न्यास परिषद (बीएसआरटीसी) ने वित्तीय पारदर्शिता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से राज्य के करीब 4,500 पंजीकृत मंदिरों, मठों, धर्मशालाओं और कबीर मठों से पिछले एक वर्ष का वित्तीय ब्योरा मांगा है। अधिकारियों ने बुधवार को यह जानकारी दी।
यह फैसला राम मंदिर में श्रद्धालुओं से प्राप्त दान के कथित गबन को लेकर हाल में उठे विवाद की पृष्ठभूमि में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
बीएसआरटीसी के अध्यक्ष रणबीर नंदन ने ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा, ‘वित्तीय पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए परिषद ने राज्य के लगभग 4,500 पंजीकृत मंदिरों, मठों, धर्मशालाओं और कबीर मठों से अप्रैल 2025 से मई 2026 की अवधि का वित्तीय विवरण मांगा है।’
उन्होंने कहा कि सभी धार्मिक संस्थानों को एक महीने के भीतर अपनी वित्तीय रिपोर्ट परिषद को सौंपनी होगी। नंदन ने बताया कि परिषद इन धार्मिक संस्थानों के वित्तीय अभिलेखों का लेखा परीक्षण (ऑडिट) करेगी।
उन्होंने कहा, ‘सभी पंजीकृत मंदिरों, मठों, धर्मशालाओं और कबीर मठों को अपनी रिपोर्ट में आय, व्यय, बैंक शेष राशि तथा जमा राशि का पूरा विवरण देना होगा।’
उन्होंने कहा कि इन संस्थानों को प्रत्येक तीन महीने पर अपना वित्तीय ब्योरा परिषद को उपलब्ध कराना होगा और भविष्य में इसे अनिवार्य अनुपालन बनाया जाएगा।
नंदन ने कहा, ‘यदि कोई संस्थान वित्तीय रिपोर्ट प्रस्तुत नहीं करता है तो परिषद ऐसे गैर-अनुपालन करने वाले संस्थानों की प्रबंधन समितियों के पुनर्गठन पर विचार करने के लिए बाध्य होगी।’
बिहार हिंदू धार्मिक न्यास अधिनियम, 1950 के अनुसार बिहार के सभी सार्वजनिक मंदिर, मठ, न्यास और धर्मशालाओं का बीएसआरटीसी में पंजीकरण अनिवार्य है तथा उन्हें परिषद के निर्देशों का पालन करना होता है।
परिषद के नवीनतम आंकड़ों के अनुसार राज्य के पंजीकृत मंदिरों और मठों के पास 18,456 एकड़ से अधिक भूमि है। राज्य में बड़ी संख्या में अपंजीकृत मंदिर और मठ भी हैं।
बीएसआरटीसी के एक अन्य अधिकारी ने बताया कि कई मामलों में अनियमितताएं सामने आई हैं, जहां कुछ पुजारियों ने स्वयं को संपत्ति का मालिक बताकर मंदिरों और मठों की अचल संपत्तियों की खरीद-फरोख्त की है।
राज्य के विधि विभाग के नवीनतम आंकड़ों के अनुसार सबसे अधिक 438 अपंजीकृत मंदिर और मठ वैशाली जिले में हैं। इसके अनुसार इसके बाद कैमूर (भभुआ) में 307, पश्चिम चंपारण में 273, भागलपुर में 191, बेगूसराय में 185, सारण में 154 और गया में 152 अपंजीकृत मंदिर और मठ हैं।
अधिकारी ने बताया कि कैमूर (भभुआ) जिले के 307 अपंजीकृत मंदिरों और मठों के पास लगभग 813 एकड़ भूमि है, जबकि खगड़िया जिले के 100 अपंजीकृत सार्वजनिक मंदिरों और मठों के पास 722 एकड़ भूमि है। उन्होंने कहा कि बांका जिले के 78 अपंजीकृत मंदिरों और मठों के पास भी लगभग 332 एकड़ भूमि दर्ज है।
भाषा कैलाश
अमित
अमित

Facebook


