कांग्रेस सरकारी योजनाओं को लेकर डर फैलाकर लोगों को ‘गुमराह’ कर रही है: चिराग पासवान

कांग्रेस सरकारी योजनाओं को लेकर डर फैलाकर लोगों को ‘गुमराह’ कर रही है: चिराग पासवान

कांग्रेस सरकारी योजनाओं को लेकर डर फैलाकर लोगों को ‘गुमराह’ कर रही है: चिराग पासवान
Modified Date: January 11, 2026 / 04:30 pm IST
Published Date: January 11, 2026 4:30 pm IST

पटना, 11 जनवरी (भाषा) केंद्रीय मंत्री और लोक जनशक्ति पार्टी (राम विलास) के राष्ट्रीय अध्यक्ष चिराग पासवान ने रविवार को कांग्रेस पर मनरेगा सहित सरकार की योजनाओं को लेकर डर फैलाकर लोगों को गुमराह करने का आरोप लगाया।

उन्होंने यहां पत्रकारों से कहा, ‘‘कांग्रेस और राजद जैसी पार्टियां सीएए, एनआरसी, मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना और वीबी-जी राम जी जैसी योजनाओं और कानूनों के इर्द-गिर्द भ्रामक विमर्श शुरू करके लोगों में भय पैदा करने की राजनीति कर रही हैं।’’

उन्होंने विपक्ष पर आरोप लगाया कि वह महात्मा गांधी की विरासत का हवाला देकर महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) का नाम बदलने को सनसनीखेज बना रहा है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) नयी योजना विकसित भारत रोजगार एवं आजीविका गारंटी मिशन (ग्रामीण) (वीबी-जी राम जी) के नाम के बजाय उसके गुणों पर बहस करने के लिए तैयार है।

 ⁠

उन्होंने कहा कि वे मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) जैसी ‘‘महत्वपूर्ण और नियमित’’ प्रक्रिया को भी चुनौती देते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि ‘‘बिहार की जनता ने लोकतांत्रिक प्रक्रिया के माध्यम से उनके वोट चोरी के आरोपों का जवाब दिया है।’’

उन्होंने कहा, ‘‘जिस तरह उन्होंने एसआईआर को लेकर हंगामा करके हमें बिहार जीतने में मदद की उसी तरह वे वीबी-जी राम जी को मुद्दा बनाकर पश्चिम बंगाल और असम जीतने में हमारी मदद करेंगे।’’

पासवान ने वीबी-जी राम जी अधिनियम का बचाव करते हुए इसे भारतीय राष्ट्र की ‘‘संघीय संरचना की तर्ज पर सामूहिक जिम्मेदारी’’ का प्रतीक बताया।

उन्होंने दावा किया, ‘‘कांग्रेस और राष्ट्रीय जनता दल (राजद) का दावा है कि वीबी-जी राम जी अधिनियम ने योजना के लिए समग्र बजट में राज्यों के योगदान को बढ़ाकर उन पर अतिरिक्त बोझ डाला है। उन्हें इस बात का एहसास नहीं है कि यह देश की संघीय संरचना की तर्ज पर सामूहिक जिम्मेदारी सुनिश्चित करने के लिए किया गया है।’’

भाषा सुरभि वैभव

वैभव


लेखक के बारे में