सरकारी बंगले को लेकर विवाद : पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी का खाली करने से इनकार
सरकारी बंगले को लेकर विवाद : पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी का खाली करने से इनकार
पटना, 30 मई (भाषा) बिहार में उस सरकारी बंगले को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है, जिसमें फिलहाल पूर्व मुख्यमंत्री और राष्ट्रीय जनता दल (राजद) की नेता राबड़ी देवी रह रही हैं और उन्होंने इसे खाली करने से इनकार कर दिया है, जबकि इसे किसी राजग के एक मंत्री को आवंटित कर दिया गया है।
भवन निर्माण विभाग ने 27 मई के एक आदेश के माध्यम से राजभवन और मुख्यमंत्री आवास के निकट स्थित 10, सर्कुलर रोड बंगले को दुग्ध एवं मत्स्य पालन मंत्री नंद किशोर राम को आवंटित कर दिया है।
आदेश जारी होने के समय राबड़ी देवी छुट्टी पर बाहर थीं। लेकिन पटना हवाई अड्डे पर उतरने के बाद जब पत्रकारों ने उनसे इस बारे में पूछा, तो वह बिफर पड़ीं। उन्होंने कहा, ‘‘मैं देख सकती हूं कि सम्राट चौधरी मुख्यमंत्री बनकर काफी उत्साहित हैं। उनकी सरकार चाहे तो मुझे बलपूर्वक बेदखल कर दे। मैं घर खाली नहीं करने वाली।’’
गौरतलब है कि जिस घर में वह एक दशक से अधिक समय से रह रही हैं, वह उन्हें जनता दल-यूनाइटेड (जदयू) अध्यक्ष नीतीश कुमार के नेतृत्व वाली पिछली सरकार ने उन्हें पूर्व मुख्यमंत्री होने के चलते आवंटित किया था। वह वर्ष 1997 में बिहार की मुख्यमंत्री बनी थीं।
विधान परिषद में नेता प्रतिपक्ष राबड़ी देवी को सरकार ने पिछले साल नवंबर में पहली बार घर खाली करने के लिए कहा था, जब नीतीश कुमार मुख्यमंत्री थे।
उस समय भवन निर्माण विभाग द्वारा जारी अधिसूचना में कहा गया था कि 10, सर्कुलर रोड तत्कालीन उपमुख्यमंत्री विजय कुमार सिन्हा को आवंटित किया जा रहा है।
हालांकि, भाजपा के वरिष्ठ नेता सिन्हा, जो मंत्रिमंडल में तो हैं, लेकिन उपमुख्यमंत्री का पद खो चुके हैं, कभी भी उस सुविधाजनक स्थान पर नहीं जा सके क्योंकि राबड़ी देवी ने बंगला छोड़ने से इनकार कर दिया था।
भवन निर्माण मंत्री और जद(यू) की वरिष्ठ नेता लेशी सिंह ने इस ताजा विवाद पर कहा कि पहले का आदेश, जिसके तहत हार्डिंग रोड स्थित 39 नंबर का बंगला विधान परिषद के नेता प्रतिपक्ष को आवंटित किया गया था, अब भी लागू है।
मंत्री ने कहा, ‘‘इसलिए राबड़ी देवी के लिए उस घर में स्थानांतरित होना बेहतर होगा।’’
सिंह ने कहा, ‘‘हमें इस बात से कोई लेना-देना नहीं है कि उन्होंने पहले के आदेश का पालन किया था या नहीं। लेकिन, सच्चाई यह है कि इन बंगलों को किसी भी गणमान्य व्यक्ति को आवंटित करना सरकार का विशेषाधिकार है। कोई भी व्यक्ति किसी बंगले पर अपना अधिकार नहीं जता सकता। हमें उम्मीद है कि पूर्व मुख्यमंत्री होने के नाते राबड़ी देवी इस बात को समझेंगी और उसी के अनुसार कार्य करेंगी।’’
भवन निर्माण विभाग के सूत्रों ने इस बात पर चुप्पी साध रखी है कि आधिकारिक अधिसूचना के बावजूद बंगला खाली करने से इनकार करने पर पूर्व मुख्यमंत्री को कोई बेदखली नोटिस दिया गया था या नहीं।
राजद संस्थापक लालू प्रसाद की पत्नी और पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी बार-बार याद दिलाती रही हैं कि चौधरी ने अपने करियर की शुरुआत उन्हीं के मंत्रिमंडल में मंत्री के रूप में की थी।
राबड़ी देवी 10,सर्कुलर रोड स्थित बंगले में अपने पति के साथ रहती हैं। इसके अलावा उनके छोटे बेटे तेजस्वी यादव भी अपना अधिकांश समय अपने माता-पिता को आवंटित इसी बंगले में ही बिताते हैं। तेजस्वी को विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष के रूप में 1,पोलो रोड स्थित बंगला आवंटित किया गया है।
शनिवार दोपहर को इलाके की पुलिस उपाधीक्षक अनु कुमारी को राबड़ी देवी के बंगले में प्रवेश करते देखा गया। ऐसा प्रतीत होता है कि उन्हें सरकार से निर्देश मिले थे कि वह 67 वर्षीय राबड़ी देवी को समझाएं।
हालांकि, उपाधीक्षक की यह दौरा बेअसर साबित हुआ, क्योंकि कुछ ही मिनटों बाद उन्हें जल्दबाजी के साथ घर से निकलते देखा गया। उन्होंने बाहर एकत्र पत्रकारों के सवालों का जवाब देने से इनकार कर दिया।
राजद प्रवक्ता चित्तरंजन गगन ने एक आक्रोशपूर्ण बयान जारी करके सत्ताधारी राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) पर विपक्ष के साथ दुर्भावनापूर्ण व्यवहार करने का आरोप लगाया।
गगन ने कहा, ‘‘सरकार हमारे नेताओं से उस एक घर को खाली कराने पर क्यों तुली हुई है, जिसमें वह 20 वर्षों से रह रहे हैं? इस सरकार को नियमों की बात नहीं करनी चाहिए। सत्तारूढ़ दल सुविधानुसार इन्हें तोड़-मरोड़ कर पेश कर देता है।’’
भाषा संतोष दिलीप
दिलीप

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