असम से बिहार में गांजे की तस्करी के मामले में अदालत ने ‘सुरक्षा चूक’ पर गंभीर चिंता जताई
असम से बिहार में गांजे की तस्करी के मामले में अदालत ने ‘सुरक्षा चूक’ पर गंभीर चिंता जताई
पटना, 21 सितंबर (भाषा) बिहार की राजधानी के बाहरी इलाके में दो नाबालिग लड़कों के बिना पंजीकरण प्रमाणपत्र (आरसी) वाली कार से असम से बड़ी मात्रा में गांजा लेकर पहुंचने के मामले में पटना उच्च न्यायालय ने “सुरक्षा व्यवस्था में हुई चूक” को लेकर गंभीर चिंता जताई है।
न्यायमूर्ति अरुण कुमार झा की एकल पीठ ने 15 सितंबर को सुनाए गए फैसले में पटना के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) को तीन महीने के भीतर मामले की जांच करने का निर्देश दिया और कहा कि आम लोगों के लिए “चाक-चौबंद सुरक्षा व्यवस्था” का राज्य का दावा छलावा प्रतीत होता है।
पीठ ने कहा कि असम से भारी मात्रा में गांजा लेकर एक वाहन का बिना किसी बाधा के बिहार पहुंच जाना बेहद चिंताजनक है। उसने कहा कि अगर वाहन में गांजे की जगह विस्फोटक होते, तो आम लोगों की जान को गंभीर खतरा हो सकता था।
पूछताछ के दौरान नाबालिगों से मिली जानकारी के आधार पर कार में बने एक गुप्त खांचे से 109 पैकेट में छिपाकर रखे गए 60 किलोग्राम से अधिक गांजे की बरामदगी हुई।
दोनों नाबालिग के पास ड्राइविंग लाइसेंस भी नहीं था। पुलिस ने उनके खिलाफ मादक औषधि एवं मन:प्रभावी पदार्थ (एनडीपीएस) अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया। किशोर न्याय बोर्ड ने दोनों नाबालिग को ‘कानून के साथ संघर्षरत बालक’ (सीआईसीएल) घोषित किया।
बाद में बोर्ड ने एक नाबालिग को जमानत दे दी, जबकि दूसरे की जमानत अर्जी खारिज कर दी। इसी आदेश को चुनौती देते हुए उसने उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया।
याचिका स्वीकार करते हुए अदालत ने कहा कि याचिकाकर्ता का यह दावा कि उसने कभी किसी विद्यालय में पढ़ाई नहीं की, इसलिए आयु प्रमाण के दस्तावेज उपलब्ध नहीं हैं, वर्तमान समय में प्रथम दृष्टया विश्वसनीय नहीं लगता।
उच्च न्यायालय ने एसएसपी को निर्देश दिया कि मामले की जांच कर यह सुनिश्चित किया जाए कि दोनों वास्तव में नाबालिग हैं।
अदालत ने कहा कि अगर जांच में पाया जाता है कि आरोपियों ने अपनी उम्र से संबंधित महत्वपूर्ण तथ्य छिपाए हैं या किसी तरह की धोखाधड़ी की है, तो राज्य सरकार उनके जमानत बांड निरस्त कराने तथा उन्हें सीआईसीएल घोषित करने वाले आदेश की समीक्षा के लिए किशोर न्याय बोर्ड का रुख कर सकेगी।
भाषा
सं कैलाश पारुल
पारुल

Facebook


