पटना, छह सितंबर (भाषा) ‘भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी-लेनिनवादी) लिबरेशन’ ने रविवार को नागरिकता संशोधन अधिनियम (सीएए) के खिलाफ शाहीन बाग में हुए प्रदर्शन और दिल्ली में तीन विवादित कृषि कानूनों के विरोध में हुए किसान आंदोलन में शामिल लोगों के खिलाफ दर्ज मामलों को वापस लेने की मांग की।
एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए भाकपा (माले)-एल के महासचिव दीपांकर भट्टाचार्य ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी पर प्रदर्शनकारियों के खिलाफ “उकसावे वाली टिप्पणियां” करने का आरोप लगाया, जिससे जमीनी स्तर और सोशल मीडिया पर युवाओं को “डराने-धमकाने और हिंसा” का सामना करना पड़ सकता है।
भट्टाचार्य ने कहा, “प्रधानमंत्री मोदी ने ‘इंस्टाग्राम’ पर एक वीडियो के जरिए छात्रों के प्रदर्शन और उनकी भाषा को सांस्कृतिक झटका बताया। यह बयान एक उकसावे की तरह था, जिसने गुंडागर्दी और हिंसा करने वाली ताकतों को प्रोत्साहित किया। इसका असर सोशल मीडिया और जमीन पर भी दिखाई दिया।”
उन्होंने नीट प्रश्नपत्र लीक मामले के विरोध में देशभर में छात्रों पर दर्ज प्राथमिकी रद्द करने के उच्चतम न्यायालय के आदेश का उल्लेख करते हुए कहा, “मैं जंतर-मंतर आंदोलन में दर्ज मामलों को वापस लिए जाने का स्वागत करता हूं। इसी तरह किसान आंदोलन और शाहीन बाग प्रदर्शन से जुड़े मामलों को भी वापस लिया जाना चाहिए।”
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए आइसा की राष्ट्रीय महासचिव नेहा बोरा ने नीट प्रश्नपत्र लीक मामले के खिलाफ जंतर-मंतर पर हुए आंदोलन को समर्थन देने के लिए बिहार के लोगों का धन्यवाद किया।
बोरा ने कहा, “आंदोलन के दौरान सम्राट चौधरी के नेतृत्व वाली बिहार सरकार का दमनकारी चेहरा सामने आया, लेकिन राज्य के लोगों ने सरकार की नीतियों और कथित दमन का विरोध कर देश के सामने एक मजबूत उदाहरण पेश किया।”
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शुभम प्रशांत
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