पूर्व जद(यू) सांसद अर्जुन राय भाजपा में शामिल
पूर्व जद(यू) सांसद अर्जुन राय भाजपा में शामिल
पटना, 27 जुलाई (भाषा) जनता दल (यूनाइटेड) के पूर्व सांसद अर्जुन राय सोमवार को भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) में शामिल हो गए।
राय ने बिहार के तत्कालीन मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) में वापसी का विरोध करते हुए करीब एक दशक पहले जद(यू) से नाता तोड़ लिया था।
राय ने 2024 का लोकसभा चुनाव राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के टिकट पर सीतामढ़ी निर्वाचन क्षेत्र से लड़ा था।
उन्होंने अपने कई समर्थकों के साथ भाजपा की बिहार इकाई के अध्यक्ष संजय सरावगी की मौजूदगी में पार्टी की सदस्यता ग्रहण की।
राय दिवंगत शरद यादव के करीबी माने जाते थे। शरद यादव जद(यू) के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष थे और वर्ष 2013 तक राजग के संयोजक भी रहे। उसी वर्ष नीतीश कुमार ने भाजपा से गठबंधन तोड़ दिया था।
इसके चार वर्ष बाद, जब नीतीश ने राजद-कांग्रेस गठबंधन से नाता तोड़कर फिर से भाजपा के साथ सरकार बनाई, तब राय उन चुनिंदा जद(यू) नेताओं में शामिल थे जिन्होंने शरद यादव का साथ देते हुए इस फैसले का विरोध किया और लोकत्रांतिक जनता दल (एलजेडी) का गठन किया।
बाद में, वर्ष 2022 में एलजेडी का जद(यू) में विलय हो गया।
सरावगी ने राय का भाजपा में स्वागत करते हुए कहा कि सीतामढ़ी लोकसभा और औराई विधानसभा सीट का जद(यू) नेता के तौर पर प्रतिनिधित्व कर चुके राय के भाजपा में आने से पार्टी और मजबूत होगी।
राजनीतिक हलकों में इस घटनाक्रम को 30 जुलाई को होने वाले बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव से पहले जन सुराज पार्टी के संस्थापक प्रशांत किशोर की यादव समुदाय के मतदाताओं से संपर्क साधने की कोशिश का जवाब देने के रूप में देखा जा रहा है।
हालांकि, बिहार का सबसे बड़ा जातीय समूह माने जाने वाले यादव समुदाय परंपरागत रूप से राजद का समर्थक रहा है, लेकिन बांकीपुर उपचुनाव में राजद की उम्मीदवार रेखा गुप्ता को प्रशांत किशोर की तुलना में कमजोर दावेदार माना जा रहा है।
किशोर उस सीट पर जीत दर्ज करने की कोशिश में हैं, जिस पर भाजपा वर्ष 1995 से कभी पराजित नहीं हुई है।
बांकीपुर में अन्य दलों की तरह यादव मतदाताओं की भी अच्छी-खासी संख्या है। उनका वोट हासिल करने के प्रयास के तहत किशोर पटना जंक्शन के आसपास के इलाके में कथित देह व्यापार के खिलाफ आवाज उठाने वाले स्थानीय निवासी बंटी यादव के अपहरण और हत्या के मुद्दे को लगातार प्रमुखता से उठा रहे हैं।
भाषा कैलाश
सुभाष
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