बिहार में सामूहिक दुष्कर्म की घटनाएं बढ़ीं, लैंगिक अपराधों के प्रति सक्रिय दृष्टिकोण अपनाएं: डीजीपी

बिहार में सामूहिक दुष्कर्म की घटनाएं बढ़ीं, लैंगिक अपराधों के प्रति सक्रिय दृष्टिकोण अपनाएं: डीजीपी

बिहार में सामूहिक दुष्कर्म की घटनाएं बढ़ीं, लैंगिक अपराधों के प्रति सक्रिय दृष्टिकोण अपनाएं: डीजीपी
Modified Date: May 12, 2026 / 04:10 pm IST
Published Date: May 12, 2026 4:10 pm IST

पटना, 12 मई (भाषा) बिहार के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) विनय कुमार ने मंगलवार को कहा कि राज्य में पिछले दो दशकों में सामूहिक दुष्कर्म की घटनाओं में वृद्धि हुई है, जिसके बाद समाज में ऐसी घटनाओं के प्रति सहनशीलता बढ़ती जा रही है।

डीजीपी पटना में स्थित पुलिस मुख्यालय में लैंगिक आधार पर हिंसा विषय पर आयोजित राज्यस्तरीय एक दिवसीय प्रशिक्षण कार्यशाला के उद्घाटन के बाद सभा को संबोधित कर रहे थे।

उन्होंने कहा, “दो दशक पहले सामूहिक दुष्कर्म की घटनाएं बहुत कम होती थीं और ऐसे मामलों पर समाज में काफी आक्रोश देखने को मिलता था, लेकिन अब ऐसी घटनाओं की संख्या बढ़ गई है, जिससे समाज में इनके प्रति सहनशीलता का स्तर भी बढ़ा है।”

कुमार ने कहा कि राज्य में यौन उत्पीड़न और हिंसा से जुड़े केवल दो प्रतिशत मामले ही दर्ज हो पाते हैं, इसके लिए पुलिस की निष्क्रियता और पीड़ितों का दमन प्रमुख कारण हैं।

डीजीपी ने तेजाब हमलों और घरेलू हिंसा जैसे लैंगिक अपराधों से निपटने के लिए सक्रिय दृष्टिकोण अपनाने और कानूनों के सख्त क्रियान्वयन की आवश्यकता पर जोर दिया।

उन्होंने कहा, “तेजाब हमले और घरेलू हिंसा से निपटने के लिए पर्याप्त कानून मौजूद हैं, लेकिन इनके प्रभावी क्रियान्वयन में अभी काफी सुधार की जरूरत है। ऐसे मामलों में समय पर न्याय सुनिश्चित करने के लिए पुलिस, अभियोजन पक्ष और अदालतों को सक्रिय भूमिका निभानी होगी।”

डीजीपी ने अधिकारियों से मामलों को समर्पण भाव से संभालने का आग्रह करते हुए कहा कि ‘बिल एंड मेलिंडा गेट्स फाउंडेशन’ समर्थित लैंगिक संवेदनशीलता और व्यवहार सुधार संबंधी अध्ययन से मिले निष्कर्ष पुलिस बल को लैंगिक अपराधों के मामलों में अधिक संवेदनशील बनने में मदद कर सकते हैं।

जनता के साथ दुर्व्यवहार करने वाले पुलिसकर्मियों को चेतावनी देते हुए कुमार ने कहा कि ऐसे पुलिसकर्मियों को “इस्तीफा देकर घर बैठ जाना चाहिए।”

उन्होंने मोतिहारी की उस घटना का उल्लेख किया जिसमें एक महिला पुलिसकर्मी पर दुष्कर्म पीड़िता का अदालत में बयान दर्ज कराने के नाम पर पैसे वसूलने का आरोप लगा था।

डीजीपी ने कहा कि इस तरह की घटनाएं पीड़ितों को दोबारा मानसिक प्रताड़ना देती हैं और ऐसे पुलिसकर्मियों के लिए सेवा में कोई स्थान नहीं होना चाहिए।

कुमार ने पुलिसिंग में “असंवेदनशील रवैये” पर असंतोष जताते हुए अधिकारियों से लोगों के प्रति विनम्र व्यवहार करने की अपील की।

उन्होंने कहा, “हम देखते हैं कि कई बार पुलिस अधिकारी, जिनमें महिलाएं भी शामिल हैं, लोगों से रूखे और अहंकारी तरीके से बात करते हैं। ऐसा नहीं होना चाहिए। पुलिसकर्मियों को लोगों के प्रति संवेदनशील और विनम्र होना चाहिए।”

डीजीपी ने दहेज प्रथा के प्रति ‘शून्य सहनशीलता’ की आवश्यकता पर बल देते हुए कहा कि यदि पुलिस सेवा में कार्यरत कोई व्यक्ति दहेज प्रथा में शामिल पाया जाता है या पहली पत्नी के रहते दूसरी शादी करता है, तो उसका सामाजिक बहिष्कार किया जाना चाहिए और यदि वह पुलिस बल में है तो उसे निलंबित कर देना चाहिए।

उन्होंने दावा किया कि पुलिस सेवा में महिलाओं की हिस्सेदारी अब 30 प्रतिशत से अधिक हो गई है, जो एक महत्वपूर्ण वृद्धि है।

कुमार ने कहा कि फिलहाल 11 हजार महिला कांस्टेबल प्रशिक्षण प्राप्त कर रही हैं तथा कई विशेषीकृत पुलिस इकाइयों की स्थापना की गई है।

उन्होंने कहा, “कई योजनाओं और पुलिस सेवा में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी के बावजूद अपेक्षित परिणाम नहीं मिल पा रहे हैं, जिसका मुख्य कारण सोच में बदलाव का अभाव है। महिलाओं के खिलाफ लैंगिक अपराधों पर रोक लगाने के लिए मानसिकता में बदलाव आवश्यक है।”

डीजीपी ने कहा कि अशिक्षित महिलाओं को उनके कानूनी अधिकारों और सुरक्षा संबंधी प्रावधानों के प्रति जागरूक करने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि महिला थानों को इस दिशा में जनजागरूकता कार्यक्रम चलाकर “सेंटर ऑफ एक्सीलेंस” की तरह कार्य करना चाहिए।

उन्होंने पुलिस प्रशिक्षण संस्थानों और थानों में कार्यशालाओं के आयोजन तथा चल रहे ‘सहयोग शिविर’ अभियानों में भागीदारी के माध्यम से जनजागरूकता बढ़ाने की आवश्यकता पर भी जोर दिया।

भाषा कैलाश जोहेब

जोहेब


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