Bhojshala Case Final Hearing: चर्चित भोजशाला मामले में हाई कोर्ट में सुनवाई हुई पूरी.. जजों ने फैसला रखा सुरक्षित, जानें क्या थी भारतीय पुरातत्व विभाग की दलील
Bhojshala Case Final Hearing: भोजशाला मामले में हाईकोर्ट ने सुनवाई पूरी कर फैसला सुरक्षित रखा, ASI और मुस्लिम पक्ष ने रखे तर्क।
Bhojshala Case Final Hearing || AI Generated File
- भोजशाला मामले में इंदौर हाईकोर्ट बेंच ने फैसला सुरक्षित रखा।
- ASI ने सर्वे रिपोर्ट और धार्मिक स्वरूप पर कोर्ट में तर्क दिए।
- सलमान खुर्शीद ने सर्वे रिपोर्ट और तस्वीरों की गुणवत्ता पर सवाल उठाए।
इंदौर: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर बेंच में चर्चित भोजशाला प्रकरण की सुनवाई मंगलवार को पूरी हुई। करीब दो घंटे से ज्यादा सुनवाई चली। (Bhojshala Case Final Hearing) मामले में सभी पक्षों के तर्क हो चुके हैं और भारतीय पुरातत्व विभाग (ASI) ने भी अपने तर्क मजबूती से रखे। अब कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रख लिया है।
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VC जरिये जुड़े सीनियर वकील सलमान खुर्शीद
इसके पूर्व सोमवार को लंबी बहस हुई थी। सुनवाई के दौरान मुस्लिम पक्ष की ओर से सीनियर एडवोकेट शोभा मेनन और सुप्रीम कोर्ट के एडवोकेट सलमान खुर्शीद ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से पक्ष रखा था, जबकि एडवोकेट तौसिफ वारसी कोर्ट में उपस्थित रहे थे।
सुनवाई के दौरान मुख्य रूप से राज्य सरकार और भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग द्वारा प्रस्तुत तर्कों और सर्वे रिपोर्ट का विरोध किया गया। वर्ष 2022 में रंजना अग्निहोत्री और उनके साथियों ने भोजशाला का धार्मिक स्वरूप तय करने तथा हिंदू समाज को पूर्ण अधिकार दिए जाने की मांग को लेकर याचिका दायर की थी। (Bhojshala Case Final Hearing) इसी प्रकरण में वर्ष 2024 में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग (ASI) ने भोजशाला परिसर में 98 दिनों तक वैज्ञानिक सर्वेक्षण किया था। बाद में 23 जनवरी 2026 को वसंत पंचमी पर पूरे दिन पूजा-अर्चना की अनुमति सुप्रीम कोर्ट ने दी थी।
6 अप्रैल से हाईकोर्ट में जारी है नियमित सुनवाई
भोजशाला मामले की नियमित सुनवाई 6 अप्रैल से हाईकोर्ट में चली। 6 से 9 अप्रैल तक हिंदू पक्ष की ओर से विष्णुशंकर जैन और विनय जोशी ने भोजशाला को मंदिर बताते हुए अपने तर्क रखे थे। एडवोकेट शोभा मेनन ने कोर्ट में कहा कि अभी यह तय नहीं हुआ है कि भोजशाला मंदिर है, मस्जिद है या जैन शाला। उन्होंने कहा कि यदि यह मंदिर होता तो वहां मूर्ति की प्राण-प्रतिष्ठा होती, जबकि ऐसा कोई प्रमाण नहीं है।
तर्क दिया कि विवादित स्थल का धार्मिक स्वरूप तय करने का अधिकार सिविल कोर्ट को है, जबकि हाई कोर्ट में अनुच्छेद 226 के तहत रिट याचिका दायर की गई है। (Bhojshala Case Final Hearing) उन्होंने यह भी कहा कि याचिकाकर्ताओं द्वारा जनहित याचिका के माध्यम से स्वयं को समाजसेवी बताना न्यायिक प्रक्रिया का दुरुपयोग है।
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सलमान खुर्शीद ने सर्वे रिपोर्ट पर उठाए सवाल
एडवोकेट सलमान खुर्शीद ने कहा कि सर्वे के दौरान उपलब्ध कराई गई वीडियोग्राफी और तस्वीरें स्पष्ट नहीं थीं तथा रंगीन फोटो भी उपलब्ध नहीं कराए गए। उन्होंने कहा कि अयोध्या मामले में रामलला विराजमान की मूर्ति मौजूद थी, जबकि भोजशाला में ऐसी कोई मूर्ति स्थापित नहीं है।
#WATCH | Indore, Madhya Pradesh: On the Dhar Bhojshala hearing, Noor Ahmed, lawyer of Muneer and Farooque, says, “In the rejoinder, we submitted that, during the previous hearing, the argument done by the government, we said that the government, ASI, is an independent agency.… pic.twitter.com/E7ghZ5rZmi
— ANI (@ANI) May 12, 2026
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