जमुई, 21 सितंबर (भाषा) बिहार के जमुई जिले में सड़क किनारे एक लड़के और लड़की के साथ ‘बदसलूकी’ के मामले में पुलिस ने सोमवार को कहा कि उसने कथित घटना से जुड़े वीडियो के आधार पर सात आरोपियों की पहचान कर ली है और उनकी गिरफ्तारी के लिए छापेमारी की जा रही है।
वहीं, बिहार राज्य महिला आयोग ने वीडियो का संज्ञान लेते हुए कथित घटना पर जिलाधिकारी से रिपोर्ट मांगी है।
जमुई के पुलिस अधीक्षक (एसपी) विश्वजीत दयाल ने संवाददाताओं से कहा कि कथित घटना 19 सितंबर की शाम की है और वायरल वीडियो में दिखाई दे रहे वाहन के नंबर के आधार पर पीड़ित लड़के और लड़की का पता लगा लिया गया है।
उन्होंने कहा, “कथित घटना दो दिन पुरानी है, लेकिन कल तक न तो पीड़ित लड़के और न ही लड़की ने पुलिस से कोई शिकायत की थी। आज जब वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ, तब हमने दोनों पीड़ितों का पता लगाया।”
दयाल ने बताया कि जमुई थाने में दर्ज प्राथमिकी में पीड़ितों ने किसी आरोपी का नाम नहीं लिया है, लेकिन वीडियो फुटेज की मदद से करीब सात लोगों की पहचान कर ली गई है और उन्हें जल्द गिरफ्तार कर लिया जाएगा।
पुलिस के मुताबिक, मामले में गिरफ्तार तीन आरोपियों से पूछताछ जारी है और सोशल मीडिया से वायरल वीडियो हटाने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है।
दयाल ने बताया कि पीड़ित लड़का और लड़की एक ही कोचिंग संस्थान में पढ़ते हैं। हालांकि, उन्होंने यह कहते हुए कोई अन्य जानकारी साझा करने से इनकार कर दिया कि “कुछ सूचनाओं को व्यक्तिगत कारणों से गुप्त रखा जाना जरूरी है।”
इस बीच, कथित ‘मॉरल पुलिसिंग’ का यह वीडियो सोशल मीडिया पर व्यापक आक्रोश का कारण बना है।
लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में इस घटना को “बेहद विचलित करने वाली” बताया। उन्होंने लिखा, “यह संस्कृति नहीं, पितृसत्तात्मकता है।”
राहुल ने आरोप लगाया कि ऐसी मानसिकता को “अंधभक्तों” ने सामान्य बना दिया है। उन्होंने वीडियो के आधार पर पहचाने गए आरोपियों के खिलाफ यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण (पॉक्सो) अधिनियम के प्रावधानों के तहत कार्रवाई की मांग की।
राहुल ने राज्य की भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) नीत सरकार से सवाल किया कि “सार्वजनिक सड़क पर भी एक लड़की सुरक्षित क्यों नहीं है?”
आम आदमी पार्टी (आप) ने अपने ‘एक्स’ हैंडल पर कथित घटना से जुड़ा वीडियो साझा करते हुए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के ‘बेटी बचाओ’ नारे का जिक्र किया और आरोप लगाया कि “भाजपा शासित बिहार में एक बेटी की गरिमा तार-तार की जा रही है।”
राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष अप्सरा ने सोमवार को कहा कि लड़कियों और महिलाओं के साथ इस तरह का व्यवहार किसी भी सूरत में स्वीकार्य नहीं है। उन्होंने बताया कि आयोग ने जमुई के जिलाधिकारी से पूरे मामले की विस्तृत जानकारी मांगी है और दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।
उधर, जनता दल-यूनाइटेड (जदयू) के प्रदेश अध्यक्ष उमेश कुशवाहा ने कहा कि राज्य सरकार ऐसी घटनाओं को लेकर पूरी तरह संवेदनशील है और दोषियों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा। उन्होंने कहा कि किसी भी आपराधिक घटना के बाद प्रशासन त्वरित कार्रवाई करता है और प्रभावशाली व्यक्ति भी कानून से ऊपर नहीं हैं।
कुशवाहा ने राष्ट्रीय जनता दल (राजद) पर निशाना साधते हुए दावा किया कि बिहार में 2005 से पहले कानून-व्यवस्था की स्थिति अलग थी, जबकि वर्तमान में दोषियों के खिलाफ तत्काल कार्रवाई की जाती है।
राजद नेता शक्ति सिंह यादव ने घटना को लेकर राज्य सरकार पर सवाल उठाए। वहीं, भाजपा प्रवक्ता मृत्युंजय तिवारी ने कहा कि सरकार मामले की गंभीरता से जांच करा रही है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाएगी।
बिहार सरकार में मंत्री सुनील कुमार ने कहा कि उन्हें घटना की जानकारी मिली है और वह जमुई के पुलिस अधीक्षक से बात कर पूरे मामले की समीक्षा करेंगे। उन्होंने कहा कि घटना में शामिल किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा।
भाषा
कैलाश पारुल
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