सरकारी चिकित्सकों की निजी प्रैक्टिस पर रोक की तैयारी, प्रोत्साहन पैकेज लाने पर विचार

सरकारी चिकित्सकों की निजी प्रैक्टिस पर रोक की तैयारी, प्रोत्साहन पैकेज लाने पर विचार

सरकारी चिकित्सकों की निजी प्रैक्टिस पर रोक की तैयारी, प्रोत्साहन पैकेज लाने पर विचार
Modified Date: January 28, 2026 / 06:59 pm IST
Published Date: January 28, 2026 6:59 pm IST

पटना, 28 जनवरी (भाषा) बिहार सरकार ग्रामीण इलाकों में स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से सरकारी चिकित्सकों की निजी प्रैक्टिस पर रोक लगाने की तैयारी कर रही है। इसके साथ ही चिकित्सकों के लिए विशेष प्रोत्साहन पैकेज लाने पर भी विचार किया जा रहा है। स्वास्थ्य विभाग के सूत्रों ने यह जानकारी दी।

सूत्रों के मुताबिक, इस पूरी प्रक्रिया को व्यवहारिक और संतुलित बनाने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने छह सदस्यीय समिति का गठन किया है, जो नीति के विभिन्न पहलुओं का गहन अध्ययन कर सरकार को अपनी रिपोर्ट सौंपेगी।

स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के अनुसार, निजी प्रैक्टिस के चलते कई बार सरकारी अस्पतालों में चिकित्सकों की नियमित उपलब्धता प्रभावित होती है, जिससे मरीजों को समय पर उपचार नहीं मिल पाता तथा दूर-दराज के ग्रामीण इलाकों में यह समस्या और अधिक गंभीर रूप ले लेती है।

उन्होंने बताया कि इसी को ध्यान में रखते हुए ‘सात निश्चय-3’ कार्यक्रम के तहत सुलभ स्वास्थ्य सेवाएं और सुरक्षित जीवन के लक्ष्य को हासिल करने के लिए यह पहल की जा रही है।

अधिकारियों ने बताया कि निजी प्रैक्टिस पर रोक लगाने से पहले यह सुनिश्चित किया जाएगा कि चिकित्सकों के मनोबल और आय पर किसी तरह का नकारात्मक असर न पड़े और इसके लिए सरकार एक ऐसी नीति तैयार की जा रही है, जिसके तहत चिकित्सकों को अतिरिक्त सुविधाएं और आर्थिक प्रोत्साहन उपलब्ध कराए जाएंगे।

समिति सरकारी अस्पतालों में चिकित्सकों की उपस्थिति, मरीजों को मिलने वाली स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता और चिकित्सकों पर पड़ने वाले कार्यभार जैसे पहलुओं का अध्ययन करेगी।

उन्होंने बताया कि इसके साथ ही यह भी आकलन किया जाएगा कि निजी प्रैक्टिस पर रोक के बाद स्वास्थ्य सेवाओं में कितना सुधार संभव है।

अधिकारियों के मुताबिक, समिति यह भी सुझाव देगी कि निजी प्रैक्टिस छोड़ने के बदले चिकित्सकों को किस प्रकार के प्रोत्साहन दिए जा सकते हैं, ताकि वे पूरी निष्ठा के साथ सरकारी सेवा में योगदान दे सकें और ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य तंत्र को मजबूती मिल सके।

भाषा कैलाश नोमान

नोमान


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