जद(यू) ने नीतीश कुमार पर फिर विश्वास जताया, निशांत कुमार को पार्टी का ‘भविष्य’ बताया

जद(यू) ने नीतीश कुमार पर फिर विश्वास जताया, निशांत कुमार को पार्टी का ‘भविष्य’ बताया

जद(यू) ने नीतीश कुमार पर फिर विश्वास जताया, निशांत कुमार को पार्टी का ‘भविष्य’ बताया
Modified Date: June 21, 2026 / 09:07 pm IST
Published Date: June 21, 2026 9:07 pm IST

(तस्वीरों के साथ)

पटना, 21 जून (भाषा) जनता दल यूनाइटेड (जदयू) ने बिहार में ‘सत्ता के सुचारू हस्तांतरण की मिसाल कायम करने’ के लिए रविवार को अपने राष्ट्रीय अध्यक्ष नीतीश कुमार की तारीफ की। पार्टी ने कहा कि अब वह पूर्व मुख्यमंत्री के बेटे निशांत में अपना ‘भविष्य’ देखती है।

यह बात जद(यू) के राष्ट्रीय प्रवक्ता राजीव रंजन प्रसाद ने पार्टी की राष्ट्रीय परिषद की बैठक के बाद प्रेसवार्ता में कही। दिन में इस बैठक से पहले पार्टी की राज्य परिषद की बैठक हुई थी।

प्रसाद ने कहा कि राष्ट्रीय परिषद ने इस साल की शुरुआत में हुए संगठनात्मक चुनाव में कुमार के राष्ट्रीय अध्यक्ष के तौर पर दोबारा चुने जाने पर मुहर लगाई तथा उन्हें ‘पार्टी की चल और अचल संपत्तियों’ के प्रबंधन के लिए एक ट्रस्ट बनाने का अधिकार भी दिया।

जद(यू) प्रवक्ता ने कहा, ‘‘पार्टी ने सर्वसम्मति से नीतीश कुमार की तारीफ़ की, जिन्होंने बिहार में सत्ता के सुचारू हस्तांतरण की मिसाल कायम की है। उनका मुख्यमंत्री का पद छोड़ना राजनीतिक शुचिता और विश्वसनीयता का उदाहरण था।’’

राज्य के सबसे लंबे समय तक मुख्यमंत्री रहे कुमार ने अपने 75वें जन्मदिन के जश्न के कुछ दिनों बाद मार्च में पद छोड़ने के फैसले की घोषणा की थी, और एक महीने बाद, राज्यसभा के लिए चुने जाने के बाद मुख्यमंत्री पद छोड़ दिया था।

जद(यू)प्रमुख के कदम को शुरू में पार्टी के साथियों ने हैरानी और चिंता की नज़र से देखा था।

नीतीश कुमार आज जब बैठक के लिए पहुंचे, तब उनका ज़ोरदार स्वागत किया गया। इसे कार्यकर्ताओं में नई उम्मीद के तौर पर देखा गया, जो निशांत के सक्रिय राजनीति में आने से उत्साहित थे।

पार्टी के प्रस्ताव की प्रतियां मीडिया के साथ साझा की गईं । इस प्रस्ताव में 70 से ज़्यादा उम्र के नीतीश कुमार की तुलना मिथिला के प्राचीन राजा ‘राजर्षि जनक’ से की गई। राजा जनक अपने संत जैसे स्वभाव के कारण ‘विदेह’ कहलाते थे।

प्रसाद ने जद(यू) के कार्यकारी अध्यक्ष संजय कुमार झा के बयान का भी हवाला दिया, जिन्होंने 44 वर्षीय निशांत में ‘अगले तीन से चार दशकों के लिए हमारा भविष्य’ देखा है।

इससे पहले, पार्टी के वरिष्ठ नेता और बिहार के मंत्री सुनील कुमार ने संवाददाताओं को बताया कि जद(यू) की राज्य परिषद की बैठक में एक ‘राजनीतिक प्रस्ताव’ पारित कर निशांत के लिए पार्टी में ‘एक बड़ी भूमिका’ की मांग की गयी है। निशांत बिहार की सम्राट चौधरी सरकार में स्वास्थ्य मंत्री हैं।

पार्टी की बैठक के बाद निशांत ने पत्रकारों से कहा, ‘‘मुझ पर पार्टी के भरोसे ने मेरे कंधों पर बड़ी ज़िम्मेदारी डाल दी है। लेकिन मुझे अपने पिता की विरासत को आगे बढ़ाना है।’’

प्रसाद ने प्रेसवार्ता में यह भी कहा कि पार्टी का मानना ​​है कि बिहार में सरकार की कमान संभालने वाले भाजपा के पहले नेता चौधरी, कुमार के दो दशक के कार्यकाल में किए गए कामों को आगे बढ़ा रहे हैं और राजग ‘पूर्ण सहयोग’ का प्रतीक है।

उन्होंने कहा, ‘‘विधानसभा चुनाव में जद(यू) ने अब तक के अपने सबसे अच्छा स्ट्राइक रेट के साथ 85 सीटें जीतीं और उसके कुछ महीनों बाद ही नीतीश कुमार ने सत्ता के हस्तांतरण का रास्ता साफ कर दिया।’’

उन्होंने यह भी कहा कि पार्टी का जनाधार मज़बूत बना हुआ है, उसके ज़्यादातर विधायक ओबीसी (अति पिछड़ा वर्ग) और ईबीसी (अत्यंत पिछड़ा वर्ग) समुदायों से हैं और पार्टी के प्राथमिक सदस्यों की संख्या ‘एक करोड़ से ज़्यादा’ है।

एक प्रस्ताव में लोकनायक जयप्रकाश नारायण द्वारा चलाई गई ‘राजनीतिक पाठशाला’ का ज़िक्र किया गया। उन्हीं के मार्गदर्शन में नीतीश कुमार ने 1970 के दशक में एक छात्र नेता के तौर पर राजनीति में पदार्पण किया था।

प्रसाद के अनुसार, अन्य राजनीतिक प्रस्तावों में पश्चिम एशिया के संकट को केंद्र सरकार द्वारा ‘बेहतरीन ढंग से संभालने’ की बात कही गई। अच्छी बात यह है कि ईरान और अमेरिका के बीच हुए समझौते से यह संकट अब खत्म होता दिख रहा है।

‘नेपाल के साथ सीमा विवादों को आपसी बातचीत से सुलझाने’ के लिए भी केंद्र सरकार की तारीफ़ की गई। केंद्र की राजग सरकार में जद(यू) भी एक सहयोगी है।

एक सवाल का जवाब देते हुए, जद(यू) प्रवक्ता ने इन बातों को खारिज कर दिया कि भोजपुर जिले में मानसिक रूप से अस्थिर व्यक्ति की हालिया मुठभेड़ में मौत इस बात का सबूत है कि भाजपा ने नीतीश कुमार के ‘न्याय के साथ विकास’ के सिद्धांत को छोड़ दिया है।

उन्होंने कहा, ‘‘भरत ठाकुर की मौत ने सभी को चौंका दिया है। राज्य सरकार की भी यही भावना है, और इसीलिए उसने न्यायिक जांच के आदेश दिए हैं।’’

भाषा

राजकुमार दिलीप

दिलीप


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