राबड़ी देवी बंगला मामले पर सम्राट चौधरी- राजशाही नहीं है, मां को एक और बेटे को दूसरा घर चाहिए
राबड़ी देवी बंगला मामले पर सम्राट चौधरी- राजशाही नहीं है, मां को एक और बेटे को दूसरा घर चाहिए
शेखपुरा, दो जून (भाषा) बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने मंगलवार को राज्य की मुख्य विपक्षी पार्टी राष्ट्रीय जनता दल (राजद) पर परोक्ष रूप से निशाना साधा जो उस सरकारी बंगले को एक मंत्री को आवंटित किए जाने को लेकर नाराजगी जता रही है जिसमें पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी रह रही थीं।
चौधरी ने विपक्षी दल या उसके नेताओं का नाम लिए बिना इस विवाद का उल्लेख करते हुए कहा, ‘‘यह राजशाही नहीं है… मां को एक घर चाहिए और बेटे को दूसरा घर चाहिए।’’
मुख्यमंत्री शेखपुरा में आयोजित ‘सहयोग शिविर’ को संबोधित कर रहे थे। राज्य सरकार ने विभिन्न विभागों से संबंधित लोगों की शिकायतों के त्वरित निस्तारण के लिए हाल ही में इस पहल की शुरुआत की है।
राबड़ी देवी 10, सर्कुलर रोड स्थित सरकारी आवास में रह रही हैं और उन्होंने विधान परिषद में नेता प्रतिपक्ष के रूप में आवंटित 39, हार्डिंग रोड स्थित आवास में अब तक स्थानांतरण नहीं किया है। वहीं, उनके पुत्र एवं विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव एक, पोलो रोड स्थित आवास में रह रहे हैं।
चौधरी ने कहा, ‘‘मैं पिछले कई वर्षों से किसी सरकारी बंगले में नहीं रहा हूं। मैं अपने निजी घर में रहता हूं।’’
उन्होंने दावा किया कि मुख्यमंत्री पद संभालने के बाद वह एक, अणे मार्ग स्थित मुख्यमंत्री के आधिकारिक आवास में केवल पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के आग्रह पर काम करने के लिए गए। इसे उनकी सरकार ने ‘लोक सेवक भवन’ नाम दिया है।
मुख्यमंत्री ने कहा, ‘‘नीतीश कुमार जी ने अपना आधिकारिक आवास खाली करने में बिल्कुल देर नहीं लगाकर एक उदाहरण प्रस्तुत किया। मैं भी कहना चाहता हूं कि जिस दिन मेरे नेता मुझे पद छोड़ने के लिए कहेंगे, मैं बिना एक पल गंवाए अपना सामान समेटकर वहां से चला जाऊंगा।’’
राजद का नाम लिए बिना उन्होंने कहा, ‘‘कुछ लोग बंगले को अपनी बपौती समझते हैं। मां के लिए एक घर और बेटे के लिए दूसरा घर चाहिए। यह कोई राजशाही नहीं है।’’
‘सहयोग शिविर’ के बारे में जानकारी देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्यभर की पंचायतों में प्रत्येक माह के पहले और तीसरे मंगलवार को ऐसे शिविर लगाए जा रहे हैं ताकि विभिन्न सरकारी विभागों से जुड़ी शिकायतों का त्वरित निपटारा सुनिश्चित किया जा सके। उन्होंने बताया कि इसके लिए सरकार पहले ही ‘सहयोग पोर्टल’ शुरू कर चुकी है।
उन्होंने कहा, ‘‘पंचायत स्तर पर सहयोग शिविर लगाकर 30 दिनों के भीतर समस्याओं का समाधान किया जाएगा। आम लोगों की समस्याओं का निवारण बिहार सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। प्रत्येक आवेदन का 30 दिनों के भीतर निपटारा होगा और अनुपालन की जानकारी सहयोग पोर्टल पर अपलोड की जाएगी।’’
मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि यदि कोई अधिकारी 30 दिनों के भीतर किसी आवेदन का निपटारा नहीं करता है या लापरवाही बरतता है, तो उसके खिलाफ विभागीय कार्रवाई की जाएगी और 31वें दिन उसे स्वतः निलंबित कर दिया जाएगा।
उन्होंने कहा कि सहयोग शिविर का उद्देश्य नागरिकों की समस्याओं का समेकित और पारदर्शी तरीके से समाधान करना है तथा राज्य सरकार आम लोगों की समस्याओं के प्रभावी और समयबद्ध निवारण के लिए लगातार प्रयासरत है।
कानून-व्यवस्था के मुद्दे पर मुख्यमंत्री ने कहा कि पुलिस को अपराधियों के खिलाफ कार्रवाई के लिए पूरी छूट दी गई है। उन्होंने कहा, ‘‘सुशासन के साथ कोई समझौता नहीं होगा। राज्य में कानून का राज कायम है। यदि कोई पुलिस को चुनौती देने का साहस करता है तो उसे 48 घंटे के भीतर जवाब दिया जाएगा।’’
राजद के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष तेजस्वी यादव द्वारा हाल में पुलिस कार्रवाई को एक विशेष जाति को निशाना बनाने वाला बताए जाने के आरोपों पर परोक्ष प्रतिक्रिया देते हुए चौधरी ने कहा, ‘‘ऐसे आरोपों का कोई मतलब नहीं है। हम सुशासन में विश्वास करते हैं। कानून-व्यवस्था से कोई समझौता नहीं होगा और अपराधियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। कानून-व्यवस्था बिगाड़ने की कोशिश करने वाले किसी भी व्यक्ति से कानून के अनुसार सख्ती से निपटा जाएगा। अपराधियों की कोई जाति नहीं होती।’’
गौरतलब है कि तेजस्वी यादव ने हाल ही में आरोप लगाया था कि बिहार में ‘‘जाति आधारित मुठभेड़’’ कराई जा रही हैं। मुख्यमंत्री की टिप्पणी को इसी आरोप के संदर्भ में देखा जा रहा है।
भाषा कैलाश मनीषा अमित
अमित

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