बिहार: विधानसभा के पटल पर रखे गए 10 संशोधन विधेयक
बिहार: विधानसभा के पटल पर रखे गए 10 संशोधन विधेयक
पटना, 20 जुलाई (भाषा) बिहार विधानसभा के मानसून सत्र के पहले दिन सोमवार को राज्य सरकार ने उच्च शिक्षा, स्वास्थ्य, भूमि, कराधान, शहरी विकास और कारोबार सुगमता से जुड़े 10 महत्वपूर्ण संशोधन विधेयकों को सदन के पटल पर रखा।
इन विधेयकों में विभिन्न कानूनों में संशोधन के साथ कुछ नए प्रावधान भी प्रस्तावित किए गए हैं।
सदन में पेश किए गए विधेयकों में बिहार निजी विश्वविद्यालय (संशोधन) विधेयक, 2026, बिहार नर्सेज पंजीकरण (संशोधन) विधेयक, 2026, बिहार चिकित्सा (संशोधन) विधेयक, 2026, बिहार कृषि भूमि (गैर-कृषि प्रयोजनों के लिए सम्परिवर्तन) (निरसन) विधेयक, 2026 शामिल हैं।
इनके अलावा बिहार भूमि दाखिल-खारिज (संशोधन) विधेयक, 2026, निबंधन अधिनियम, 1908 (बिहार संशोधन) विधेयक, 2026, भारतीय स्टाम्प (बिहार संशोधन) विधेयक, 2026, बिहार जुआ (प्रतिषेध) विधेयक, 2026, बिहार माल और सेवा कर (संशोधन) विधेयक, 2026, बिहार नगर विकास विधेयक, 2026 तथा ‘बिहार ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ विधेयक, 2026 भी सदन के पटल पर रखे गये।
सदन में इन विधेयकों पर चर्चा के बाद आगे की विधायी प्रक्रिया पूरी की जाएगी।
सरकार का कहना है कि प्रस्तावित संशोधनों का उद्देश्य शिक्षा, स्वास्थ्य, भूमि प्रशासन, राजस्व व्यवस्था, शहरी विकास तथा निवेश-अनुकूल वातावरण को मजबूत बनाना है।
बिहार भूमि दाखिल-खारिज (संशोधन) विधेयक, 2026 में भूमि के दाखिल-खारिज से संबंधित प्रत्येक याचिका, अपील के ज्ञापन और पुनरीक्षण आवेदन पर 200 रुपये शुल्क लगाने का प्रावधान किया गया है।
विधेयक के अनुसार, वर्तमान में बिहार भूमि दाखिल-खारिज अधिनियम के तहत दाखिल-खारिज से संबंधित याचिका, अपील अथवा पुनरीक्षण आवेदन पर न्यायालय शुल्क स्टाम्प लगाने का प्रावधान है, लेकिन अलग से कोई निर्धारित शुल्क नहीं है। सरकार का कहना है कि लोक कल्याणकारी राज्य की आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए राजस्व बढ़ाना आवश्यक है।
विधेयक के कानून बनने के बाद भूमि अथवा भू-खंड के दाखिल-खारिज से संबंधित प्रत्येक याचिका, अपील के ज्ञापन और पुनरीक्षण आवेदन पर 200 रुपये शुल्क लिया जाएगा।
राज्य सरकार विशेष अथवा सामान्य आदेश के माध्यम से समय-समय पर इस शुल्क में संशोधन भी कर सकेगी।
सरकार ने बिहार कृषि भूमि (गैर-कृषि प्रयोजनों के लिए सम्परिवर्तन) (निरसन) विधेयक, 2026 भी सदन में पेश किया, जिसके माध्यम से बिहार कृषि भूमि (गैर-कृषि प्रयोजनों के लिए सम्परिवर्तन) अधिनियम, 2010 को निरस्त करने का प्रस्ताव किया गया है।
सरकार ने निबंधन अधिनियम, 1908 (बिहार संशोधन) विधेयक, 2026 भी पेश किया, जिसके तहत भूमि के उपयोग, प्रकृति अथवा श्रेणी में परिवर्तन से संबंधित ‘रूपांतरण (सम्परिवर्तन) दस्तावेज’ को निबंधन अधिनियम की धारा 17 के तहत अनिवार्य रूप से पंजीकरण योग्य दस्तावेजों में शामिल करने का प्रस्ताव किया गया है। सरकार ने इसके अलावा भारतीय स्टाम्प अधिनियम, 1899 (बिहार संशोधन) विधेयक, 2026 भी सदन में पेश किया।
भाषा कैलाश जितेंद्र
जितेंद्र

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