राज्य सरकार ने सिंधु दर्शन यात्रा के लिए वित्तीय सहायता योजना को दी मंजूरी

राज्य सरकार ने सिंधु दर्शन यात्रा के लिए वित्तीय सहायता योजना को दी मंजूरी

राज्य सरकार ने सिंधु दर्शन यात्रा के लिए वित्तीय सहायता योजना को दी मंजूरी
Modified Date: June 17, 2026 / 08:56 pm IST
Published Date: June 17, 2026 8:56 pm IST

पटना, 17 जून (भाषा) बिहार सरकार ने बुधवार को राज्य के स्थायी निवासियों के लिए लेह-लद्दाख स्थित सिंधु दर्शन यात्रा के लिए वित्तीय सहायता प्रदान करने संबंधी योजना को मंजूरी दे दी।

मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की अध्यक्षता में हुई मंत्रिमंडल की बैठक में यह निर्णय लिया गया।

‘सिंधु दर्शन तीर्थयात्रा वित्तीय सहायता अनुदान योजना, 2026’ को स्वीकृति देने का प्रस्ताव पर्यटन विभाग की ओर से लाया गया था।

मंत्रिमंडल की बैठक में कुल 29 प्रस्तावों को मंजूरी दी गई। मंत्रिमंडल विभाग के अपर मुख्य सचिव अरविंद कुमार चौधरी ने सूचना भवन में आयोजित संवाददाता सम्मेलन में कहा , ‘‘बिहार के स्थायी निवासियों को लद्दाख में सिंधु नदी के दर्शन कराने तथा उन्हें भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत से जोड़ने के उद्देश्य से ‘सिंधु दर्शन तीर्थयात्रा वित्तीय सहायता अनुदान योजना, 2026’ को मंजूरी दी गई है।

इस योजना के तहत तीर्थयात्रियों को वित्तीय सहायता उपलब्ध कराई जाएगी, ताकि अधिक खर्च के कारण आर्थिक रूप से कमजोर श्रद्धालु भी इस पवित्र यात्रा को कर सकें।’’

उन्होंने कहा योजना के तहत पात्र राज्यवासियों को यात्रा पूरी करने के बाद वित्तीय सहायता प्रदान की जाएगी।

प्रस्ताव के अनुसार, तीर्थयात्रियों को यात्रा पर हुए व्यय का 50 प्रतिशत अथवा प्रति यात्री 20,000 रुपये, जो भी कम हो, प्रतिपूर्ति के रूप में दिया जाएगा।

प्रस्ताव में कहा गया है कि गंगा और सिंधु दोनों नदियां भारत की सांस्कृतिक एकता की प्रतीक हैं।

इस दृष्टि से सिंधु दर्शन यात्रा राज्य के लोगों के लिए धार्मिक, आध्यात्मिक, सांस्कृतिक और पर्यटन की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है। चौधरी के अनुसार उत्तर प्रदेश, छत्तीसगढ़, हरियाणा, गुजरात, राजस्थान और मध्य प्रदेश जैसे कई राज्यों में भी तीर्थयात्रियों को वित्तीय सहायता प्रदान करने वाली योजनाएं संचालित की जा रही हैं।

मंत्रिमंडल ने ‘बिहार नागरिक सुरक्षा क्षेत्रीय आशुलिपिक संवर्ग नियमावली’ में संशोधन को मंजूरी दे दी, जिसके बाद अब इंटरमीडिएट उत्तीर्ण 18 वर्ष के युवा भी आशुलिपिक (स्टेनोग्राफर) पद पर सीधी भर्ती के लिए पात्र होंगे।

स्वीकृत संशोधन के तहत आशुलिपिक पद पर सीधी नियुक्ति के लिए न्यूनतम आयु सीमा 21 वर्ष से घटाकर 18 वर्ष कर दी गई है। इसके साथ ही नवनियुक्त कर्मियों की परिवीक्षा (प्रोबेशन) अवधि भी दो वर्ष से घटाकर एक वर्ष कर दी गई है।

सरकार के अनुसार, इस संशोधन से इंटरमीडिएट पास युवाओं को कम उम्र में ही सरकारी सेवा में प्रवेश का अवसर मिलेगा।

इसके साथ ही परिवीक्षा अवधि कम किए जाने से नियुक्त कर्मियों की सेवा शीघ्र स्थायी हो सकेगी।

आपदा प्रबंधन विभाग द्वारा लाए गए प्रस्ताव में कहा गया है, ‘‘इस संशोधन से इंटरमीडिएट उत्तीर्ण राज्य के पात्र युवाओं को कम आयु में ही सरकारी सेवा में प्रवेश का अवसर मिलेगा। साथ ही परिवीक्षा अवधि कम होने से नवनियुक्त कर्मियों की सेवा शीघ्र स्थायी हो सकेगी।’’

‘ग्रीनफील्ड सैटेलाइट टाउनशिप’ क्षेत्र में भूमि की खरीद-बिक्री और हस्तांतरण पर लगी रोक तथा भू-स्वामियों की तात्कालिक आवश्यकताओं को देखते हुए मंत्रिमंडल ने बिहार समेकित भूमि क्रय नीति, 2026 के तहत बिहार राज्य आवास बोर्ड को भूमि खरीदने का अधिकार देने के प्रस्ताव को भी मंजूरी दी।

प्रस्ताव के अनुसार, इस निर्णय से भू-स्वामियों को अपनी तत्काल वित्तीय आवश्यकताओं की पूर्ति में सहायता मिलेगी तथा सरकार को अपनी विभिन्न योजनाओं के लिए भूमि उपलब्ध कराने में सुविधा होगी।

मंत्रिमंडल ने पर्यटकों को पर्यटन स्थलों के बीच तेज और सुविधाजनक यात्रा की सुविधा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से ‘मुख्यमंत्री बिहार हेली-पर्यटन एवं वायु पर्यटन सेवा योजना, 2026’ को भी मंजूरी प्रदान की।

प्रस्ताव में कहा गया है, ‘‘इस योजना के संचालन से पर्यटकों को त्वरित और आरामदायक यात्रा सुविधा मिलेगी, जिससे अधिक संख्या में पर्यटक आकर्षित होंगे। योजना का उद्देश्य व्यावसायिक लाभ अर्जित करना नहीं, बल्कि पर्यटन को बढ़ावा देना और क्षेत्रीय संपर्क को सुदृढ़ करना है।’’

योजना के पहले चरण को 15 जुलाई 2026 से 15 जनवरी 2027 तक लागू करने का प्रस्ताव है।

इसकी शुरुआत वाल्मीकिनगर (पश्चिम चंपारण), मां मुंडेश्वरी मंदिर (कैमूर) और राजगीर (नालंदा) से की जाएगी।

वाल्मीकिनगर के लिए सरकारी विमान का उपयोग किया जाएगा, जबकि कैमूर और राजगीर के लिए किराये के हेलीकॉप्टर तैनात किए जाएंगे।

भाषा कैलाश

संतोष

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