पटना, सात जनवरी (भाषा) बिहार में मकर संक्रांति के मौके पर आयोजित होने वाले दही-चूड़ा भोज के लिए राष्ट्रीय जनता दल (राजद) प्रमुख लालू प्रसाद के पुत्र और जनशक्ति जनता दल (जेजेडी) के अध्यक्ष तेज प्रताप यादव ने राज्य के उपमुख्यमंत्री विजय कुमार सिन्हा को न्योता दिया है।
बिहार की राजनीति में मकर संक्रांति को केवल पर्व नहीं, बल्कि सियासी संवाद का मंच माना जाता रहा है। इस बार यह मंच पूर्व मंत्री यादव सजाने जा रहे हैं। पिता लालू प्रसाद की वर्षों पुरानी दही-चूड़ा परंपरा को तेज प्रताप न सिर्फ जीवित करने का प्रयास कर रहे हैं, बल्कि उसे अपनी नई राजनीतिक पहचान से भी जोड़ने की कोशिश में हैं।
यादव बुधवार को उपमुख्यमंत्री सिन्हा के सरकारी आवास पहुंचे और 14 जनवरी को मकर संक्रांति पर होने वाले दही-चूड़ा भोज के लिए उन्हें पारंपरिक तिलक लगाकर आमंत्रित किया।
यह मुलाकात संक्षिप्त रही, लेकिन इसके राजनीतिक निहितार्थ दूरगामी माने जा रहे हैं। सत्ता पक्ष के एक बड़े चेहरे के घर जाकर न्योता देना संकेत देता है कि यादव अब केवल विरोध की राजनीति तक सीमित नहीं रहना चाहते।
यादव ने पत्रकारों से बातचीत में कहा, “पर्व जोड़ने के लिए होते हैं, तोड़ने के लिए नहीं। राजनीति अपनी जगह है, लेकिन संस्कार और परंपराएं भी जरूरी हैं।”
उन्होंने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार समेत सत्ता पक्ष और विपक्ष के तमाम अहम नेताओं को आमंत्रित करने की घोषणा की, जिससे इस आयोजन को लेकर चर्चा और तेज हो गई है।
इससे यह आयोजन इसलिए भी अहम माना जा रहा है क्योंकि यह पहली बार है जब यादव अपनी अलग पार्टी जेजेडी के बैनर तले ऐसा राजनीतिक-सामाजिक कार्यक्रम कर रहे हैं।
इससे पहले उन्होंने राष्ट्रीय लोक मोर्चा (रालोमो) के नेता और बिहार सरकार में मंत्री दीपक प्रकाश से भी मिलकर उन्हें दही-चूड़ा का न्योता दिया। दीपक रालोमो प्रमुख उपेंद्र कुशवाहा के बेटे हैं। वह विधानमंडल के किसी सदन का सदस्य न होते हुए भी मंत्री हैं।
उल्लेखनीय है कि राष्ट्रीय जनता दल (राजद) प्रमुख लालू प्रसाद के दौर में दही-चूड़ा भोज बिहार की राजनीति का ऐसा अध्याय रहा है, जहां कट्टर विरोधी भी एक साथ बैठकर भोजन करते दिखते थे। अब उसी विरासत को तेज प्रताप यादव नए अंदाज में आगे बढ़ाना चाहते हैं।
भाषा कैलाश
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