आरएसएस के निर्देश पर आरक्षण को लेकर मांझी-पासवान में तकरार: तेजस्वी यादव

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आरएसएस के निर्देश पर आरक्षण को लेकर मांझी-पासवान में तकरार: तेजस्वी यादव

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  • Publish Date - August 30, 2026 / 06:28 PM IST,
    Updated On - August 30, 2026 / 06:28 PM IST

पटना, 30 अगस्त (भाषा) राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष तेजस्वी यादव ने रविवार को आरोप लगाया कि केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान और जीतन राम मांझी अति वंचित दलितों के लिए उप-श्रेणी के मुद्दे पर ‘‘नागपुर के निर्देश’’ पर आपस में उलझ रहे हैं।

नागपुर में आरएसएस का मुख्यालय है।

बिहार विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष यादव ने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा)-राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) पर ‘‘आरक्षण विरोधी’’ होने का भी आरोप लगाया।

राजद नेता ने कहा, ‘‘तेजस्वी यादव ने कभी आरक्षण का लाभ नहीं लिया, लेकिन चिराग पासवान और जीतन राम मांझी दोनों इस सुविधा का लाभ लेते हैं। इसके बावजूद वे आरक्षण विरोधी भाजपा-आरएसएस के साथ हैं। उनका आपसी विवाद नागपुर के निर्देश पर हो रहा होगा।’’

तेजस्वी यादव ने यह टिप्पणी उस संदर्भ में की कि दोनों केंद्रीय मंत्री आरक्षित सीटों से चुनाव लड़ते हैं।

यादव ने दोनों दलित नेताओं को चुनौती दी कि वे अपने पदों से इस्तीफा दें और किसी सामान्य सीट से चुनाव लड़कर दिखाएं।

राजद नेता शनिवार को लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के प्रमुख चिराग पासवान और हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा के संस्थापक जीतन राम मांझी के बीच छिड़ी जुबानी जंग को लेकर पूछे गए सवालों का जवाब दे रहे थे।

हाजीपुर से सांसद चिराग पासवान ने मांझी और उनके बेटे द्वारा ‘‘कोटे के भीतर कोटा’’ के समर्थन में दिए गए बयानों पर आपत्ति जताई थी। पासवान ने दोनों को इस्तीफा देने और यह स्वीकार करने की चुनौती दी थी कि वे ‘‘क्रीमी लेयर’’ में आते हैं।

गया से सांसद जीतन राम मांझी और राज्य सरकार में मंत्री उनके बेटे संतोष कुमार सुमन ने पलटवार करते हुए कहा कि इस्तीफा तो चिराग पासवान को देना चाहिए, क्योंकि वह सबसे वंचित दलित समुदायों के लक्षित विकास की जरूरत को समझने में विफल रहे हैं।

यादव ने जोर दिया कि भारत में आरक्षण खत्म होने की संभावना नहीं के बराबर है। उन्होंने कहा, ‘‘कोई भी आरक्षण खत्म नहीं कर सकता। आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने 2015 में आरक्षण की समीक्षा की बात कही थी और बिहार की जनता ने उन्हें सबक सिखाया।’’

यादव का इशारा संभवतः 2015 के विधानसभा चुनाव में नीतीश-लालू के नेतृत्व वाले महागठबंधन के हाथों राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) की हार की ओर था।

राजद नेता ने कहा कि भाजपा ‘‘पानी में कंकड़ फेंककर’’ केवल लोगों के रुख का अंदाजा लगाने की कोशिश कर रही है।

भाषा आशीष सुरेश

सुरेश