पटना, 30 अगस्त (भाषा) ऑल इंडिया पसमांदा मुस्लिम महाज के अध्यक्ष एवं पूर्व सांसद अली अनवर अंसारी ने रविवार को आरोप लगाया कि केंद्र की भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की सरकार जाति जनगणना को लेकर गंभीर नहीं है।
उन्होंने कहा कि सरकार ने जनता के दबाव में जाति जनगणना कराने की घोषणा तो कर दी, लेकिन इसके लिए तैयार की गई ‘ओपन हेडेड’ प्रश्नावली से आशंका पैदा होती है कि 2011 की जनगणना की तरह इस बार भी जातियों से संबंधित आंकड़े स्पष्ट रूप से सामने नहीं आ पाएंगे।
‘ओपन हेडेड’ प्रश्नावली का मतलब है ऐसी प्रश्नावली जिसमें जवाब के लिए पहले से तय विकल्प नहीं दिए जाते, बल्कि व्यक्ति को अपना जवाब खुद लिखना होता है।
अंसारी ने एक बयान में केंद्र सरकार से मांग की कि जाति जनगणना को 2022-23 में बिहार में कराए गए जातिगत सर्वेक्षण की तर्ज पर कराया जाए। उन्होंने कहा कि इससे विभिन्न जातियों की संख्या के साथ उनकी सामाजिक-आर्थिक स्थिति का भी स्पष्ट आकलन हो सकेगा।
उन्होंने कहा कि प्रत्येक राज्य में जातियों की राज्य सूची और केंद्र सरकार की सूची होती है। उन्होंने यह भी कहा कि केंद्र की प्रश्नावली में अनुसूचित जाति (एससी), अनुसूचित जनजाति (एसटी), अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) और सामान्य वर्ग से जुड़े सवालों के साथ संबंधित राज्य और केंद्रीय जाति की सूचियों को भी शामिल किया जाना चाहिए, ताकि लोग अपनी जाति का नाम स्पष्ट रूप से दर्ज करा सकें। उन्होंने कहा कि ऐसा नहीं किया गया तो जाति जनगणना के आंकड़े अस्पष्ट हो सकते हैं।
अंसारी ने दावा किया कि आरक्षण विरोधी ताकतें भी सक्रिय हो गई हैं। उन्होंने कहा कि केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा ऐसे नेताओं से बातचीत कर रहे हैं और बातचीत सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ने की बात कही जा रही है।
उन्होंने आरोप लगाया कि मुस्लिम समाज में भी कुछ आरक्षण विरोधी तत्व भ्रम फैला रहे हैं और लोगों से जाति के कॉलम में अपनी बिरादरी के बजाय ‘मुसलमान’ लिखने को कह रहे हैं।
पूर्व सांसद ने कहा कि उन्होंने 18 दिसंबर 2009 को राज्यसभा में सबसे पहले जाति जनगणना का मुद्दा उठाया था और पसमांदा मुस्लिम महाज इस मांग को लेकर लगातार सक्रिय रहा है।
भाषा गोला वैभव
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