किसी राजनीतिक दल से गठबंधन नहीं करेंगे, जनता ही हमारी सहयोगी : प्रशांत किशोर

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किसी राजनीतिक दल से गठबंधन नहीं करेंगे, जनता ही हमारी सहयोगी : प्रशांत किशोर

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  • Publish Date - August 3, 2026 / 08:32 PM IST,
    Updated On - August 3, 2026 / 08:32 PM IST

पटना, तीन अगस्त (भाषा) जन सुराज पार्टी के संस्थापक प्रशांत किशोर ने सोमवार को बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव में जीत के बाद किसी भी राजनीतिक दल के साथ गठबंधन की संभावना से इनकार करते हुए कहा कि उनकी जीत भारतीय जनता पार्टी (भाजपा), कांग्रेस और राष्ट्रीय जनता दल (राजद) जैसे दलों के असंतुष्ट समर्थकों के सहयोग से संभव हो सकी।

भाजपा के नीरज कुमार को 19 हजार से अधिक मतों से हराने के बाद पत्रकारों से बातचीत में किशोर ने कहा कि उनकी पार्टी किसी भी राजनीतिक गठबंधन का हिस्सा नहीं बनेगी।

बांकीपुर सीट पर 1995 से लगातार भाजपा का कब्जा रहा था, लेकिन इस उपचुनाव में जन सुराज ने पहली बार यहां पर जीत दर्ज की।

गठबंधन की संभावना और चुनाव अकेले लड़ने की अपनी पहले की रणनीति पर पुनर्विचार किए जाने संबंधी सवाल पर किशोर ने कहा, ‘‘हम किसी से गठबंधन नहीं करेंगे। हमारा गठबंधन बिहार की जनता के साथ होगा। आप देखिए कि बांकीपुर की जनता ने स्थापित राजनीतिक दलों को छोड़कर हमें समर्थन दिया है।’’

इस जीत के साथ जन सुराज पार्टी का बिहार विधानसभा में पहली बार प्रतिनिधित्व होगा।

किशोर ने कहा, ‘‘मैं आम मतदाताओं का आभार व्यक्त करने के साथ-साथ उन लोगों का भी धन्यवाद करना चाहता हूं जिन्होंने जन सुराज का साथ दिया, भले ही वे हमारी पार्टी के सदस्य नहीं हैं। ऐसे लोग सभी दलों में थे—भाजपा, राजद और कांग्रेस में भी।’’

हालांकि, प्रशांत के जीत के बाद कुछ राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि विपक्ष को इस बदले हुए राजनीतिक माहौल का लाभ उठाने का प्रयास करना चाहिए।

पूर्व नौकरशाह एवं राजनीतिक विश्लेषक डी.एन. तिवारी ने कहा, ‘‘इसलिए विपक्ष को वैचारिक मतभेदों से ऊपर उठकर प्रशांत किशोर के साथ आने का प्रयास करना चाहिए। कांग्रेस, राष्ट्रीय जनता दल (राजद) और वाम दलों को इस बने हुए माहौल का लाभ उठाना चाहिए।’’

तिवारी पहले राजद और जनता दल (यूनाइटेड) से जुड़े रहे हैं।

इस बीच, नाम नहीं प्रकाशित करने की शर्त पर भाजपा के एक वरिष्ठ नेता ने कहा कि यह हार ऐसे समय में हुई है जब पार्टी पहले से कई चुनौतियों का सामना कर रही है। उन्होंने कहा, ‘‘यह पराजय इससे अधिक प्रतिकूल समय पर नहीं आ सकती थी। ‘जेन-जेड’ के हालिया प्रदर्शनों ने युवाओं, खासकर सवर्ण समुदाय के युवाओं के बीच हमारे कमजोर पड़ते समर्थन को उजागर कर दिया है, जो लंबे समय से हमारा प्रमुख समर्थन आधार रहे हैं। विवादास्पद यूजीसी (विश्वविद्यालय अनुदान आयोग) विनियमों को लेकर वे पहले ही असंतुष्ट थे और अब उन्हें लगने लगा है कि पार्टी उन्हें हल्के में ले रही है।’’

भाषा कैलाश अमित

अमित