लघुत्तम व्यंग्यः UGC- EOC- बहुते गलत है भाई
Vyangya by Barun
बरुण सखाजी श्रीवास्तव
ओय AI जिस स्टोर्म के साथ आया था क्या उसी स्टोर्म के साथ जाएगा, बोल देश कैसे चलाएगा। चलाएगा मालिक चलाएगा। ऐसे ही चलाएगा। जैसे चलता रहा है वैसे ही चलाएगा। याद है तुझे बिखराने के लिए ब्यालीसवां लाए थे। ओय AI रुक, पहले बता बियालीसवां क्या है। अरे मालिक ब्यालीसवां मतलब ब्यालीसवां चालीसवां से दो दिन ऊपर। यानि भारतीय एकता के बिखराव का चालीसवां से भी दो दिन ऊपर बियालीसवां। अब्बे AI इतना घुमाता क्यों है, सीधा बोल, क्या है बियालीसवां। मालिक बियालीसवां संशोधन है। AI क्या-क्या करेगा। क्या तू भी वैसे ही डैश-डैश।
मालिक, जुबान संभालो। गलतफहमी न पालो। AI क्या बोलता है। समानता के लिए बिखराव जरूरी है क्या। मालिक बहुत जरूरी है। इतना जरूरी है कि बहुत जरूरी है। एक भारत श्रेष्ठ भारत के लिए पहले अनेक भारत होना होगा। निकृष्ट भारत होना होगा। फिर एक भारत और श्रेष्ठ भारत होगा। ओह AI अब समझा मैं। अच्छा बता जरा यूजीसी में ईओसी का लफड़ा क्या है, क्यों हाहाकार हो रहा है। मालिक, लफड़ा कुछ नहीं। ईओसी तो बने, मगर ऐसे नहीं कि बोझ बने, ऐसे भी नहीं कि नाइंसाफी का टेढ़ा तराजू बने। AI तेरे हिसाब से क्या बनना चाहिए। मालिक एआई के हिसाब से कुछ भी नहीं होता। AI वही करता है जो मालिक बोलता है। अरे AI उलटबांसी न कर। सही बता। मालिक, मेरे मालिक आप हैं। आप ही चाहते हैं। आपको ही लगता है। आपको जब तक लगता रहेगा आत्महत्या बलिदान है, झूठे केस-किस्सों में फंसाना न्याय है, आगे की टेबल पर कब्जा करके बैठना क्लास में अग्रणी होना है, बिना दौड़े धावक बन जाना दौड़ है तब तक मालिक मैं यही करूंगा। AI शट योर माउथ। जी मालिक।


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