Vande Bharat: संसद तक पहुंची रसोई की आग, ऊर्जा संकट पर आर-पार! क्या सरकार इस पर दे पाएगी कोई ठोस जवाब?

Parliament sparred over energy crisis

Vande Bharat: संसद तक पहुंची रसोई की आग, ऊर्जा संकट पर आर-पार! क्या सरकार इस पर दे पाएगी कोई ठोस जवाब?

Parliament sparred over energy crisis. Image Source- IBC24

Modified Date: March 13, 2026 / 12:45 am IST
Published Date: March 13, 2026 12:15 am IST

नई दिल्लीः Parliament sparred over energy crisis देश की संसद में गुरुवार को गहराते LPG संकट को लेकर विपक्ष ने सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। राहुल गांधी ने ऊर्जा सुरक्षा को लेकर सरकार पर तीखे प्रहार करते नजर आए तो दूसरी तरफ सरकार ने आरोपों को खारिज कर कांग्रेस को झूठ और भ्रम की सियासी रोटी ना सेंकने की नसीहत दी।

Parliament sparred over energy crisis गुरुवार को संसद परिसर में नारेबाजी, पोस्टर और सरकार के खिलाफ विपक्ष के तीखे तेवर का नजारा देखने को मिला। देश में गहराते सिलेंडर संकट को लेकर राहुल गांधी की अगुवाई में विपक्षी सांसदों ने ‘नरेंदर भी गायब, सिलेंडर भी गायब’ के नारे लगाए। विपक्ष का सीधा आरोप है कि सरकार की गलत नीतियों की वजह से आम आदमी की रसोई तक पहुंचना अब मुश्किल हो गया है। सदन के भीतर भी हालात जुदा नहीं थे। सुबह 11 बजे जैसे ही कार्यवाही शुरू हुई, विपक्ष ने नारेबाजी शुरू कर दी। दिलचस्प बात यह रही कि कल ही स्पीकर ओम बिरला के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव खारिज हुआ था और आज वे दोबारा कुर्सी पर लौटे। उन्होंने सांसदों को शांत कराने की कोशिश की, लेकिन हंगामा नहीं थमा।

विदेश नीति और ऊर्जा सुरक्षा पर उठे सवाल

राहुल गांधी ने सरकार की विदेश नीति और ऊर्जा सुरक्षा पर बड़े सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि “कमजोर विदेश नीति ने देश को खतरनाक स्थिति में लाकर खड़ा कर दिया है। वहीं, कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी ने प्रधानमंत्री के दावों पर चुटकी लेते हुए कहा कि उन्हें उम्मीद है पीएम सही हों, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है।

सरकार ने किया पलटवार

विपक्ष के इन तीखे हमलों पर पलटवार करने में सरकार ने भी देर नहीं की। केंद्रीय मंत्री रामदास अठावले ने राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए कहा कि वे ‘झूठे आरोप लगाने में एक्सपर्ट’ हो गए हैं और इन दावों में कोई तथ्य नहीं है। फिलहाल गैस की किल्लत और बढ़ती कीमतों ने सियासी पारे को गरमा दिया है। अब देखना यह होगा कि क्या सरकार सदन में इस पर कोई ठोस जवाब देती है या यह गतिरोध आगे भी जारी रहेगा।

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