NindakNiyare: दुविधाओं से मुक्त हो जाइए, क्या चल रहा है ठीक से समझ जाइए
Ayodhya Ram Mandir Donation Scam SIT Report / IMAGE SOURCE : screengrab

Barun Sakhajee
बरुण सखाजी श्रीवास्तव
भावनाओं का ज्वार। अफवाहों का बाजार। धर्म का कारोबार। चंदा हुआ पार। यह एक क्रम है। इस क्रम में केंद्रीय ताकत है सियासत। पांच सौ साल का संघर्ष। एक आंदोलन। एक भावना। एक मंदिर। बना अदालती आदेश पर। बनाया ट्रस्ट ने। संरक्षा दी सरकार ने और चंदा खा गए अदने से लोग। बात हजम नहीं होती। हिंदुत्व के विराट रथ को आगे ले जा रहे हिंदुओं के लिए भाजपा सप्त-अश्व यानी सात घोड़ों का काम कर रही है। मजबूरी ये है कि इस समाज के पास भाजपा को छोड़ दें तो दूसरे कोई अश्व हैं भी नहीं। तब हिंदू रथ तो सनातन काल से ही भव्य था, रहेगा भी, लेकिन आगे बढ़ेगा कैसे?
हिंदू समाज की इस विवशता को धर्म के ठेकेदार, अगुवा, पहरेदार भांप गए हैं। घोटालों को देखने, शामिल होने, आलोचना करने और भूल जाने के लिए हम विख्यात हैं। अगर कभी मुक्ति के लिए कोई प्रयोग किए भी गए तो केजरीवाल जैसा भारी विफल प्रयोग सिद्ध हुआ। अब हम तैयार हैं इस चंदाखोरी को देखने के लिए, कहीं कुछ मौका हो तो शामिल होने के लिए और आलोचना तो कर ही रहे हैं। रही बात भूलने की तो वह शायद जल्दी न सही, मगर भूल भी जाएंगे।
अगर भूले नहीं हिंदू तो करे क्या? बाकी दल हिंदू नाम से गुरेज करते आए हैं। इतिहास को चिढ़चिढ़ाकर ढांकने वाली गैंग सैंकड़ों साल से सक्रिय है। भारत को हिंदू भारत मानने से भागते हैं। हिंदुओं को हिंदू मानने से डरते हैं। कभी जातिय गौरव को हीनता बनाकर पेश करते हैं, कभी नेचुरल भेद को डिस्क्रिमिनेशन कहकर मॉकरी करते हैं। प्रचंड विचार, शोध, संज्ञान, विमर्श और विस्तार वाला हिंदू षडयंत्रों को पार करता है। मानवता को ढाल बनाए रखता है, कहीं बम बांधकर फटता नहीं। लेकिन प्रश्न है कि आखिर विश्वास किस पर करे। राम मंदिर नहीं बना था, न इतने जल्दी बनने के आसार थे तब हिंदुओं ने भाजपा को 282 और 303 सीटें दे डालीं। जब बनकर तैयार हो गया तो 240 पर ला गिराया। कैसे मान लें कि मंदिर राजनीतिक लाभदायक है। आस्था के मामले में स्पष्टता के साथ सफाई करते रहने की जरूरत है। हिंदुओं को अपना कन्फ्यूजन भी दूर करने की जरूरत है। ऐसा कालखंड बड़ा मुश्किल से मिल स कता है जब सामान्य जीवन की सुविधाएं, जरूरतें, आकांक्षाएं भी बराबर पूरी हो रही हैं और अपना प्रज्ञा, ऋचा, शोध, वांग्मय, चिंतन, मंथन, मनन, संस्कृति, जीवन व्यवहार, पहचान भी पोषित हो रही है। तब हिंदुओं को भी सोचना होगा। दुविधा से मुक्त होना होगा। स्पष्टता के साथ आगे बढ़ना होगा। दो ही चीजें हैं, या है या नहीं है, बीच का कोई रोल नहीं। यानी दुविधाओं से मुक्त हो जाइए, जो चल रहा है उसे समझ जाइए।

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