NindakNiyre: राज्यसभा में भाजपा का मास्टर प्लान, कैसे, कहां से क्यों मैदान में लाई गई हैं लक्ष्मी वर्मा
बरुण सखाजी श्रीवास्तव, सह-कार्यकारी संपादक, आईबीसी-24
भाजपा ने छत्तीसगढ़ से अपने राज्यसभा उम्मीदवार का ऐलान कर दिया है। पॉलिटिकल मैथ्स कहता है, प्रदेश में कांग्रेस-भाजपा को एक-एक सीटें जा रही हैं। इस लिहाज से सम्मति बनी रही तो 5 को पर्चा होगा और उसी दिन ऐलान भी। भाजपा से उम्मीदवारों की लंबी फेहरिश्त थी। स्वभाविक है होगी ही। अंत में लक्ष्मी वर्मा पर पार्टी ने दांव खेल दिया। चलिए समझते हैं, लक्ष्मी वर्मा ही क्यों, क्या मायने और असर होंगे प्रदेश की सियासत पर।
लक्ष्मी वर्मा कुर्मी समाज से आती हैं। महिला फेस हैं। निर्विवाद हैं। निर्गुट हैं। संवेदनशील हैं। पढ़ी-लिखी विचारवान हैं। संघ की सिपाही हैं। रायपुर लोकसभा क्षेत्र से आती हैं। अनुभव सरकार और संगठन दोनों का है। शांत रहते हुए अपने मंतव्य और गंतव्य को लेकर सदैव संजीदा रही हैं।
भाजपा की राज्यसभा उम्मीदवार लक्ष्मी वर्मा कुर्मी होने के नाते जहां कांग्रेस के राजनीतिक छत्तीसगढ़ियावाद को बोथरा करेंगी। तो वहीं महिला होने के नाते सियासी पिच पर महिला आरक्षण और महतारी वंदन को लेकर भाजपा के मंतव्य को बल देंगी। रायपुर इलाके से आने के नाते रमेश बैस जैसे बड़े स्टेचर की कमी को भी भर सकेंगी। टंकराम वर्मा को मंत्री बनाकर पार्टी ने जो उम्मीद की थी उसकी कमी को लक्ष्मी वर्मा पूरा कर सकेंगी। भाजपा ने स्थानीय के साथ ही राष्ट्रीय समीकरणों को भी साधा है।
पार्टी के पास अब प्रदेश की दो बड़ी ओबीसी कम्युनिटी के दो बड़े नेता हैं। साहू समाज से अरुण साव, कुर्मी समाज से लक्ष्मी वर्मा। एसटी से स्वभाविक रूप से सीएम साय और सामान्य से डॉ. रमन सिंह की तरह किरणदेव और विजय शर्मा खड़े हो रहे हैं। दरअसल कांग्रेस के राजनीतिक छत्तीसगढ़ियावाद को सबसे ज्यादा समर्थन कुर्मी समाज से ही मिलता है, जबकि साहू, यादव, देवांगन, कलार, एससी, एसटी, जेनरल की इस मुद्दे में ज्यादा रुचि नहीं होती। ऐसे में भाजपा के मौजूदा कुर्मी नेताओं में अजय चंद्राकर, विजय बघेल, टंकराम वर्मा, नारायण चंदेल, धरमलाल कौशिक कुर्मी समाज में पैठ कम रखते हैं। इसका ही फायदा उठाकर भूपेश बघेल राजनीतिक छत्तीसगढ़ियावाद को ठीक से खेल पा रहे थे।
भाजपा के आंतरिक नक्शे में अरुण साव और लक्ष्मी वर्मा जुड़कर काम करें तो प्रदेश की 42 फीसद ओबीसी को ठीक ढंग से थामा जा सकता है। सियासी अंक कहते हैं, एसटी, एससी के इतर प्रदेश में ओबीसी जिसके साथ है वही सरकार बनाता है। इस गणित के हिसाब से लक्ष्मी वर्मा का चयन ठीक नजर आता है।

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