बरुण सखाजी श्रीवास्तव
इस साल देशभर के 22 राज्यों की 72 राज्यसभा सीटें खाली हो रही हैं। इनमें से 33 सीटें अप्रैल में खाली हो जाएंगी। इन 72 में से एनडीए के पास 28 सीटें हैं। विधानसभा के आंकड़ों के देखें तो एनडीए 48 सीटों तक पहुंच सकता है। 72 में से 33 सांसदों का कार्यकाल अप्रैल में पूरा हो रहा है। इनमें 2 छत्तीसगढ़ की सीटें भी शामिल हैं। ये दोनों सीटें कांग्रेस की फूलोदेवी नेताम और केटीएस तुलसी के पास हैं। 9 अप्रैल को पूरे हो रहे इस कार्यकाल के लिए नियमानुसार मार्च दूसरे सप्ताह तक चुनाव कार्यक्रम जारी हो जाना चाहिए।
अब सवाल ये है कि छत्तीसगढ़ से राज्यसभा भेजा किसे जाएगा। कांग्रेस ने साल 2022 में रंजीता रंजन और राजीव शुक्ला को भेजकर भाजपा के हाथों बाहरी-स्थानीय का मुद्दा थमा दिया था। इसलिए इस बार इस पिच पर दोनों ही दल खेल नहीं पाएंगे। आंकड़े कहते हैं, छत्तीसगढ़ में एक राज्यसभा सीटे के लिए 31 विधायकों की जरूरत है। इस लिहाज से कांग्रेस के पास एक सीट जीतने का बल है। भाजपा के पास 54 विधायक हैं, जिनमें दो सीटें नहीं जीती जा सकती, लेकिन एक आराम से जीत सकते हैं। इन सभी मसलों को समझने के लिए चरणबद्ध तरीके से बात करते हैं।
चरण-1, क्या भाजपा जोड़-तोड़ करना चाहेगी?
छत्तीसगढ़ में राजनीतिक जोड़-तोड़ का सकारात्मक इतिहास नहीं है। दूसरी बात भाजपा को कम से कम 8 कांग्रेस विधायक तोड़ने होंगे, जो कि छत्तीसगढ़ में लाख असहमतियों के बीच भी संभव नहीं है।
चरण-2, तो क्या बाहरी किसी को भेजेंगे या नहीं?
कांग्रेस की आलोचना के कारण भाजपा पहल नहीं करेगी, लेकिन कांग्रेस ने अगर किया तो भाजपा भी पीछे नहीं रहेगी।
चरण-3, भाजपा क्या फॉर्मूला अपना सकती है?
भाजपा ने पिछली बार राज्यसभा भेजने के लिए आदिवासी फॉर्मूला अपनाया था। उत्तरी छत्तीसगढ़ से भेजा गया है। जाहिर है इस बार या तो मध्य से होना चाहिए या दक्षिण से और या तो दलित वर्ग से हो या सामान्य। सामान्य में भी यूजीसी जैसे मसलों को डायल्यूट करने के लिए ब्राह्मण पर दांव खेल सकती है। इसके अलावा एक फॉर्मूल एज का भी हो सकता है। एक बाहरी का भी हो सकता है।
चरण-4, तो भाजपा किन पर दांव लगाएगी?
भाजपा के पास बाहर से भेजने के लिए नितिन नबीन हैं। बिहार में भी इस 5 सीटों पर चुनाव है। आंकड़े कहते हैं एनडीए इन पांचों पर जीत सकती है। तो जाहिर है भाजपा के पास विकल्प है। वह नहीं चाहेगी बाहरी की तोहमत ले। अगला नाम ओपी चौधरी हो सकते हैं। फिलहाल सफल वित्तमंत्री हैं। चौधरी नीति, व्यवहार को समझते हैं। आईएएस रह चुके हैं। उनका मिजाज भी बड़े फलक पर काम करने का है। राज्य की राजनीति में वे फंसे-फंसे भी नजर आते हैं। मोदी चाहेंगे उनका इस्तेमाल इस सदी के दूसरे क्वार्टर को मजबूत करने में करें। विजन 2047 पर भी उनका अच्छा इनवॉल्वमेंट है। लेकिन वे भी रायगढ़ से हैं जहां से पिछली बार राजा देवेंद्र प्रताप सिंह भेजे गए थे। कोई दूसरा मंत्री भी हो सकता है। एक संभावना यह है कि मंत्री न हो तो बड़े नेताओं में ओबीसी से लक्ष्मी वर्मा का लगभग तय मानना चाहिए। यूजीसी विवाद को ठंडा करना हो तो सरोज पांडेय इकलौता नाम है। ब्राह्मण हैं, महिला हैं, वायब्रेंट हैं, निर्विवाद हैं। विधायकों की संख्या भी नहीं घटेगी।
चरण-5, कांग्रेस किसे भेजेगी?
कांग्रेस में सारी चीजें गांधी परिवार से तय होती हैं, इसलिए कयास मुश्किल है। ओबीसी से ताम्रध्वज साहू, टीएस सिंहदेव सामान्य वर्ग पर दांव लगा सकती है। कांग्रेस किसी मौजूदा विधायक को नहीं भेजेगी। मोहम्मद अकबर भी पार्टी की च्वाइस हो सकते हैं। कांग्रेस की आंतरिक रणनीति में असम, बंगाल, यूपी में मुस्लिम वोटर्स पर फोकस वर्किंग पर चर्चा हुई है।
निष्कर्ष
नटशेल में कहें तो भाजपा से सरोज पांडेय, लक्ष्मी वर्मा नितिन नबीन और कांग्रेस से ताम्रध्वज साहू, टीएस सिंहदेव, चंदन यादव हो सकते हैं।
Sakhajee.blogspot.com