Paramhans_Shrirambabajee: अव्यक्त अनुभूत सत्य है, इसकी अभिव्यक्ति की आवश्यकता नहीं
बरुण सखाजी श्रीवास्तव अध्यात्म या दर्शन का भाव जैसे-जैसे गहरा होता जाता है वैसे-वैसे हमारी अभिव्यक्ति बढ़ती जाती है। यही काम आयु के साथ भी होता है। हम जितने बूढ़े, …

श्रीराम बाबाजी हनुमानजी
Barun Shrivastava
Published: 06 Jan 2026 | 8:48 pmModified: 09 Jul 2026 | 10:41 pm
बरुण सखाजी श्रीवास्तव
अध्यात्म या दर्शन का भाव जैसे-जैसे गहरा होता जाता है वैसे-वैसे हमारी अभिव्यक्ति बढ़ती जाती है। यही काम आयु के साथ भी होता है। हम जितने बूढ़े, बड़े होते जाते हैं उतने ही अनुभव बयान करने लगते हैं। जीवन के अपने अनुभव साझा करना अच्छी बात है। इससे संसार को अनुभवों का फायदा मिलता है, लेकिन अध्यात्म की दुनिया में इनका साझा करना बहुत ही नुकसानदेह है। अध्यात्म और दर्शन का क्षेत्र मौन, भीतर बैठकर आनंद में रहने का क्षेत्र है। जितना ज्यादा बोलेंगे, लिखेंगे, कहेंगे, सुनेंगे और सुनाएंगे उतने ज्यादा रीतते जाएंगे। रीता हुआ आदमी अध्यात्म में गहरे नहीं उतर पाता। अध्यात्म और दर्शन ऐसा हलवा है हर चम्मच पर नया स्वाद देता है। ऐसा स्वाद कि हम वाह कहे बिना रह नहीं सकते। हर चम्मच जुबान पर रखते ही ऐसा लगता है क्या कहें, बनाने वाले की तारीफ करें या देने वाले की तारीफ करें या फिर पास में बैठे व्यक्ति को भी इसका स्वाद चखाएं। बस कुछ भी करें अपने भीतर के आनंद को बताएं। इसे अभिव्यक्ति कहते हैं। आध्यात्मिक अभिव्यक्तियां हमारे भीतर के सारे रस को बाहर निकाल फेंकती हैं। इससे बचना चाहिए।
इस बात को हमारे सनानत शास्त्र, ग्रंथ और परंपराओं में अलग ढंग से बताया गया है। ग्रंथों में लिखा गया है अपने पुण्य बताने से निमेष मात्र भी इनका प्रभाव नहीं रह जाता है। इसलिए अपनी डीड्स यानी सत्कर्मों को यूं ही बताते नहीं चलना चाहिए। कितना दान कर रहे हैं, किसे भोजन करवा रहे हैं, कितना क्या हो रहा है यह सब जितना गोपनीय हो उतना अच्छा। भजन की भी यही स्थिति रखना चाहिए। आवरण भी अपना ऐसा बनाकर रखना चाहिए कि कोई समझ ही न पाए। कई साधू, संत बाहरी तौर पर अशुद्धि से रहते हैं, ताकि वे संसार रूप से आकर्षक न दिखें। अघोर तो एक पूरी परंपरा ही इसके लिए समर्पित है।
परमहंस श्रीराम बाबाजी अपने भौतिक स्वरूप को एक थैला और लंगोटी, अंगेछा में ही प्रकट करते थे। कहां, किसे, कितना, कैसे किया यह सब कभी प्रकट नहीं होता था। किसी भावनात्मक ट्रैप में नहीं पड़ते थे। कोई उनसे अपेक्षा करे कि भगवन मेरा फलां काम करवा दीजिए तो ऐसा होगा, वैसा होगा, तो परमहंस श्रीराम बाबाजी इस मामले में हंसते थे। न कोई मंत्र, न तंत्र, न यंत्र। जो होगा परमसत्ता की कृपा से होगा। किसी को कोई श्राप नहीं किसी को कोई वरदान नहीं। वे भौतिक स्वरूप में हनुमानजी होकर भी तथास्तु जैसे शब्दों से भी बचते थे। क्योंकि तथास्तु अस्तित्व के कामकाज में दखल है। परमात्मा कभी इस दखल में नहीं पड़ते। जो किया है वह भोगना होगा। जो किया है वह पाना होगा। यही कर्मसिद्धांत है।
ब्रह्मप्रकाश संत इतने सक्षम होते हैं कि एक पल में हमारा सारा कष्ट, सारी भोगना हर लें, लेकिन परमहंस श्रीराम बाबाजी ऐसा नहीं करते थे। वे इसकी कैपेसिटी, मारक क्षमता कम कर देते थे, लेकिन जो लिखा है वह तो सामने आएगा। नहीं आएगा तो अगले जन्म में फिर आएगा। इसलिए जो भोगना है वह भोग लेना चाहिए। कर्मसिद्धांत स्पष्ट कहता है करने का टाला अगले जन्म में जाएगा। कृपा से टल जाए, लेकिन अगले जन्म में नए सिरे से सारी भोगना प्रकट होगी।
एक बार हनुमानजी परमहंस श्रीराम बाबाजी मंडला से रायपुर की यात्रा पर थे। मेरे साथ मेरे मित्र भी थे। वे पीछे बैठे महाराजजी से कुछ जिज्ञासाएं कर रहे थे। महाराज जी ने कुछेक जिज्ञासाओं का उत्तर दिया उसके बाद बोले, भजन करो, हम नै कुई हे सुनाएं नै कुई की सुनैं। प्रवचन, कथा, ज्ञान चक्कर हैं और हमरो रस्ता सीधो है। नै इते की नै उते की। समंझ अ जाए तो ठीक नई तो हम तो जे जा रै। (हिंदीः भजन करो, हम न किसी की सुनते, न किसी को सुनाते, प्रवचन, कथा, ज्ञान सब चक्कर हैं और हमारा रास्ता सीधा है। न इधर की न उधर की, समझ आ जाए तो ठीक नहीं आए तो हम ये जा रहे हैं।)
परमहंस श्रीराम बाबाजी परिभाषाओं, व्याख्याओं में कभी नहीं पड़ते थे। एक लाइन में हजारों ग्रंथों का रस देते थे। जो व्याख्या करना है हम करते रहें। जैसे लेना है हम लेते रहें। उनकी लाइन सीधी थी। सिर्फ भजन करो। अभिव्यक्तियों से दूर बहुत दूर। अपनी मस्ती का निर्जन, भीतर समाधि में, अनंत आनंद में विराजमान परमहंस श्रीराम बाबाजी सत्य अव्यक्त कहे जाने चाहिए।
(आगे पढ़िए कर्म सिद्धांत का ग्राफ)
Web Title: paramhans_shrirambabajee-Express without expression
ब्लॉग
और भी पढ़ें ›
UPITS: यूपीआईटीएस: गांव से ग्लोबल तक नारी शक्ति
01 Oct 2026 | 8:39 am
यूपीआईटीएस: लोकल से ग्लोबल की बड़ी छलांग
29 Sept 2026 | 4:07 pm
अखिलेश यादव की रायबरेली से राहुल गांधी को सीधी चुनौती
26 Sept 2026 | 7:29 pm
एआई से सेमीकंडक्टर तक.. भविष्य गढ़ रहा उत्तर प्रदेश
20 Sept 2026 | 5:29 pm
मातृशक्ति के सम्मान से गढ़ता यूपी का नया भविष्य
10 Sept 2026 | 4:30 pm
हर समीकरण की सीमा लांघने वाला उत्तर प्रदेश का यक्ष प्रश्न
04 Sept 2026 | 3:19 pm
जेपीएनआईसी को संजीवनी पर हायतौबा क्यों?
31 Aug 2026 | 2:41 pm
रक्षाबंधन पर दिखी यूपी में कानून-व्यवस्था की ताकत
29 Aug 2026 | 8:05 pm