शह मात The Big Debate: अब चिप का सुरक्षा चक्र.. क्या ऐसे बचेगी गाय? गौ संरक्षण पर सदन गर्म, क्या इससे गौशालाओं में गायों की दुर्दशा थम पाएगी? देखिए ये वीडियो

अब चिप का सुरक्षा चक्र.. क्या ऐसे बचेगी गाय? गौ संरक्षण पर सदन गर्म, Politics over cow in Madhya Pradesh

शह मात The Big Debate: अब चिप का सुरक्षा चक्र.. क्या ऐसे बचेगी गाय? गौ संरक्षण पर सदन गर्म, क्या इससे गौशालाओं में गायों की दुर्दशा थम पाएगी? देखिए ये वीडियो

Bhopal Cow Meat/

Modified Date: March 1, 2026 / 12:35 am IST
Published Date: February 28, 2026 11:45 pm IST

भोपालः MP News मध्यप्रदेश में गायों के संरक्षण-संवर्धन और गौ हत्याओं को लेकर बीजेपी-कांग्रेस के बीच सियासी शमशीरें खिंचती रही हैं और अब एक बार फिर गौ संरक्षण को लेकर जुबानी जंग छिड़ी है। बीजेपी सरकार गायों की टैगिंग के लिए स्मार्ट चिप की व्यवस्था लागू करने जा रही है तो कांग्रेस-बीजेपी सरकार पर भ्रष्टाचार के आरोप मढ़ रही है।

MP News दरअसल, मध्यप्रदेश सरकार अब पालतू और बेसहारा गाय की पहचान के लिए अलग-अलग रंग के टैग लगाने की तैयारी में है। एमपी के पशुपालन मंत्री ने लखन पटेल ने विधानसभा में बताया कि इसको लेकर केंद्र सरकार से भी मंजूरी मिल गई है। दरअसल, एमपी में लंबे समय से गौशालाओं में गायों के हालातों को लेकर सियासत गरमाती रही है। गौशालाओं में कागज़ों पर गायों की संख्या बढ़ाकर अनुदान लेने के आरोप लगते रहे हैं। इस बीच सरकार गायों पर टैग लगाने जा रही है। इस टैग में जीपीएस चिप होगी जिसके जरिए गौशालाओं में गायों की अटेंडेंस लग सकेगी। गौ पालन की जवाबदेही सुनिश्चित हो रही तो मामले में सूबे की सियासत भी गरमा गई। बीजेपी इसे सीएम मोहन की गौ पालन के प्रति प्रतिबद्धता बता रही है।

कांग्रेस को बीजेपी की ये पहल रास नहीं आई। कांग्रेस निशाना साध रही है कि गौ रक्षक सरकार के पास प्रदेश में कुल गायों का आंकड़ा नहीं है। बीजेपी सरकार गाय के नाम पर भ्रष्टाचार कर रही है। गायों के संरक्षण- संवर्धन के दावों और नई जीपीएस टैगिंग को लेकर बीजेपी-कांग्रेस आमने-सामने हैं, लेकिन सवाल ये कि गायों की जीपीएस टैगिंग का काम आखिर कब तक पूरा होगा? सवाल ये कि-बिना आंकड़ों के ये टास्क कैसे पूरा पाएगा? सवाल ये भी कि-क्या इससे गौ हत्या पर रोक लगेगी और गौशालाओं में गायों की दुर्दशा थम पाएगी? सबसे बड़ा सवाल ये कि ये कैसी सनातन भक्ति है कि गायों को कांजी हाउस में डाल दिया जाता है, लेकिन गौ-पालकों की जिम्मेदारी नहीं तय होती?

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सवाल आपका है.. पत्रकारिता के माध्यम से जनसरोकारों और आप से जुड़े मुद्दों को सीधे सरकार के संज्ञान में लाना मेरा ध्येय है। विभिन्न मीडिया संस्थानों में 10 साल का अनुभव मुझे इस काम के लिए और प्रेरित करता है। कुशाभाऊ ठाकरे पत्रकारिता एवं जनसंचार विश्वविद्यालय से इलेक्ट्रानिक मीडिया और भाषा विज्ञान में ली हुई स्नातकोत्तर की दोनों डिग्रियां अपने कर्तव्य पथ पर आगे बढ़ने के लिए गति देती है।