Bijapur Vidhansabha Chunav 2023: क्या इस बार मंडावी के खिलाफ खरा उतर पाएंगे गागड़ा? जानें बीजापुर सीट का क्या है समीकरण
Bijapur Vidhansabha Chunav 2023: क्या इस बार मंडावी के खिलाफ खरा उतर पाएंगे गागड़ा? जानें बीजापुर सीट का क्या है समीकरण
बीजापुर। Bijapur Vidhansabha Chunav 2023 विधानसभा चुनाव को लेकर जिले में सरगर्मिया तेज हो गई है। बीजापुर विधानसभा चुनाव हाईप्रोफाइल सीट के नज़रिए से देखा जा रहा है। मैदान में राष्ट्रीय पार्टी के दो दिग्गज नेताओ ने अपनी पूरी ताकत झोंक दी है। वोटरों को लुभाने कई तरह के पैतरे अपना रहे हैं। पिछली दफा भोपालपटनम क्षेत्र से विक्रम मंडावी को आठ हजार से अधिक वोट से लीड मिली थी। जिले भर की बात करे तो उनकी लीड का आंकड़ा एक्कीस हजार पांच सौ चौरियासी रहा।
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Bijapur Vidhansabha Chunav 2023 2018 के विधानसभा चुनाव में विक्रम मंडावी को 44011, महेश गागड़ा को 22427, सकनी चन्द्रेया 2696 हरीश पामभोई को 2004, संतोष पूनम को 999, त्रिपल यालम 942, जेम्स कुडियाम को 920 वोट मिले थे। भाजपा से महेश गागड़ा 4 थीं और कांग्रेस से विक्रम मंडावी तीसरी बार विधानसभा चुनाव मैदान में है। 2013 में महेश गागड़ा ने विक्रम मंडावी को नौ हजार चार सौ सत्तासी वोट से हराया था महेश गागड़ा को 29578, विक्रम मंडावी को 20091, अलवा मदनीय को 5942, नीना रावतीय 2829 रंग राम नेताम 2622 संतोष पुनेम को 2489 वोट मिले थे।
पिछले दो विधानसभा में एक बार महेश गागड़ा और एक बार विक्रम मंडावी की जीत हुई है। इस दफा भी दोनों प्रत्याशियों में कांटे की टक्कर देखी जा रही है। सरकार व वर्तमान विधायक अपने पांच साल के विकास कार्यो को लेकर जनता के बीच जा रही है वही भाजपा वर्तमान सरकार की खामियां भरस्टाचार के मुद्दों को लेकर जनता के बीच अपनी बयान बाजी कर रही है। जिले के चारों ब्लॉक से ज़्यादा भोपालपटनम इलाके में चुनावी माहौल की ज्यादा सक्रियता दिखाई पड़ रही है। हाल ही में सड़क दुर्घटना में घायल होने के बावजूद विक्रम चुनाव प्रचार में एड़ी-चोटी का जोर लगाए हुए हैं विक्रम मंडावी का ज्यादा फोकस ग्रामीण इलाकों में है। बतकम्मा स्थल पर मतदाताओं को लुभाने कोई कसर नही छोड़ रहे है। इसी तरह महेश गागड़ा भी चुनावी कमान खुद संभाले हुए हैं। उनका भी जनसंपर्क जोरो पर चल रहा हैं।
देखा जाए तो विधायक विक्रम मंडावी की जमीनी सक्रियता का सीधा लाभ उन्हें चुनाव में मिल सकता है। गागड़ा के 2018 में हारने के बाद विपक्ष की भूमिका निभाने के बजाए बीजापुर से बाहर रहते थे। इसका परिणाम यह रहा कि क्षेत्र में उनकी पकड़ कमजोर हो रही थी। टिकट फाइनल होने के बाद वे मैदान में बड़ी जोश के साथ उतर गए है। उनके कार्यकर्ता बड़ी लगन के साथ मैदानी इलाकों में काम कर रहे है। कांग्रेस विधायक नें भाजपा पूर्व विधायक व प्रत्याशी को पलायन नेता बताया तो भाजपा प्रत्याशी नें कांग्रेस प्रत्यासी सिटिंग एम एल ए व भ्रष्टाचार विधायक बताया।

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