#SarkarOnIBC24: 24 का रण, मोदी Vs विरोधी! भाजपा को रोकने विपक्षी हुंकार आखिर कितना करेगी असर?
24 का रण, मोदी Vs विरोधी! भाजपा को रोकने विपक्षी हुंकार आखिर कितना करेगी असर? How much effect will the opposition's noise have on stopping BJP?
रायपुरः चौथे चरण के रण के बाद अब विपक्ष पूरी ताकत के साथ चुनाव प्रचार कर रहा है। जमानत पर बाहर आए दिल्ली के सीएम केजरीवाल हों, या फिर सपा प्रमुख अखिलेश यादव हर कोई बीजेपी को सत्ता से बाहर करने को बेकरार दिख रहा है। इधर अमेठी और रायबरेली में कांग्रेस अपने तरकश के सारे तीर निकाल रही है। अमेठी-रायबरेली से गांधी परिवार के रिश्ते की दुहाई दी जा रही है तो राहुल की रिकॉर्ड जीत का दावा किया जा रहा है।
2024 के सियासी समर में इस बार विपक्ष आक्रमक प्रचार कर रहा है। हर राज्य में विपक्ष अपने सबसे बड़े नेता के साथ मैदान में है। सोशल इंजीनियरिंग, घोषणापत्र और मोदी पर निशाना साधकर विपक्ष पूरा माहौल बनाए हुए है। आज यूपी के अमेठी में कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी ने जनसभा को संबोधित किया और स्मृति ईरानी पर तंज कसते हुए कहा कि अमेठी से गांधी परिवार का रिश्ता 50 साल पुराना है। हम सांसद रहे, न रहें ये रिश्ता हमेशा रहेगा। स्मृति इरानी अपने राजनीतिक मकसद के साथ अमेठी आई हैं।
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इधर दिल्ली के सीएम केजरीवाल हरियाणा के कुरुक्षेत्र में रोड शो किया और कहा कि बीजेपी हरियाणा, राजस्थान में हार रही है और कई राज्यों में बीजेपी की सीटें कम हो रही है। केजरीवाल ने ये भी कहा कि अगर जनता ने झाड़ू को वोट दिया तो वो दोबारा जेल नहीं जाएंगे। इधर समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव ने कहा कि जैसे-जैसे चरण आगे बढ़ रहा है। जनता का गुस्सा भी बीजेपी के खिलाफ बढ़ता ही जा रहा है।
इधर रायबरेली में प्रचार के लिए पहुंचे कांग्रेस नेता सचिन पायलट ने राहुल गांधी की रिकॉर्ड जीत का दावा किया है तो वाराणसी में पीएम मोदी के नामाकन में शामिल होने पहुंचे चिराग पासवान ने विपक्ष को बंटा हुआ बताकर पीएम की ऐतिहासिक जीत का दावा किया। एक तरफ बीजेपी बचे हुए चरणों में पूरा जोर लगाने के मूड में दिखती है तो विपक्ष भी अपने तरकश के सारे तीर इस चुनाव में आजमा लेना चाहता है। इस चुनाव में पूरे विपक्ष की सामूहिक प्रतिष्ठा और राजनीतिक भविष्य दांव पर है। 2024 में बेहतर प्रदर्शन उन्हें उत्साहित करेगा और हार समूचे विपक्ष की राजनीति को रसातल तक ले जा सकती है। 4 जून को जब पेटी खुलेगी तो कई सियासी दलों और सियासतदानों के भविष्य का फैसला हो ही जाएगा।

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