नियमित पढ़ाई ने बनाया अव्वल, रुचिका त्रिवेदी, रायसेन
नियमित पढ़ाई ने बनाया अव्वल, रुचिका त्रिवेदी, रायसेन
पढ़ाई के लिए कोई निश्चित शेड्यूल तो नहीं बनाया, लेकिन पढ़ाई रेगुलर की। सुबह, शाम और रात जब भी मन किया पढ़ाई में ध्यान लगाया। कभी भी तनाव में पढ़ाई नहीं करना। न पेरेंट्स का दबाव रहा, न परीक्षा को लेकर तनाव। यह कहना है रुचिका का, जिसे नियमित पढ़ाई व सहज दिनचर्या ने सफलता दिलाई।
रायसेन जिले की बौद्ध नगरी सांची से प्रदेश में 12वीं कक्षा में दूसरे नंबर पर आई रुचिका त्रिवेदी ने जिले का ही नही बल्कि अपने स्कूल और बौद्ध नगरी का नाम भी रोशन किया है। सांची शा. कन्या उच्चतर माध्यमिक विद्यालय की छात्रा रुचिका की इस कामयाबी पर पिता सुशील त्रिवेदी औैर मां दोनो को गर्व है। आर्ट सब्जेक्ट से 12वीं क्लास में प्रदेश में दूसरा स्थान लाने वाली रुचिका इस कामयाबी का श्रेय अपनी मेहनत और रोज आठ घंटे पढ़ाई के साथ अपनी प्रिंसिपल भावना देशमुख मैडम, अपने पिता और माता को देती है । वह आगे जाकर कलेक्टर बनकर देश-प्रदेश की सेवा करना चाहती है। रुचिका अपने घर में दो बच्चों में बड़ी है। खाली समय में वह शतरंज खेलना पसंद करती है और अपने छोटे भाई रितिक को पढ़ाती है। रुचिका बताती है कि उसके स्वर्गीय दादाजी शिक्षक थे और उन्होंने ही उसका काफी मार्गदर्शन किया था। पढ़ाई के बीच अपने दादा के देहांत से दुखी रुचिका थोड़े समय पढ़ाई से दूर रही यही वजह है कि वो प्रदेश में पहला स्थान प्राप्त नही कर पाई। रुचिका की मां ममता त्रिवेदी गृहिणी है और अपने बच्चों की पढ़ाई में निरंतर साथ देती आ रही है। रुचिका के पिता सुशील त्रिवेदी सांची नगर परिषद में एआरआई हैं। रुचिका को स्कूल में शिक्षक गौरीशंकर अहिरवार का काफी सहयोग मिला। अर्थशास्त्र पढ़ाने वाले गौरीशंकर अहिरवार को अपनी शिष्या पर गर्व है। रुचिका की स्कूल प्रिंसिपल भावना देशमुख ने बताया कि रुचिका पढ़ने में काफी होशियार है और अपने स्कूल की सांस्कृतिक गतिविधियों में भी बढ़ चढ़ कर हिस्सा लेती रही है।

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