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RTE Admission 2026: नई दिल्ली: भारत सरकार ने हर बच्चे को शिक्षा का अधिकार देने के लिए RTE यानी Right to Education Act, 2009 लागू किया है। इस कानून के तहत 6 से 14 साल के बच्चों को मुफ्त और अनिवार्य शिक्षा का अधिकार प्राप्त है। विशेष रूप से आर्थिक रूप से कमजोर और वंचित वर्ग के बच्चों को निजी स्कूलों में 25% सीटें मुफ्त शिक्षा के लिए आरक्षित की गई हैं। सरकार स्कूल को इन बच्चों की फीस देती है, माता-पिता से कोई शुल्क नहीं लिया जाता।
RTE एडमिशन पूरी तरह ऑनलाइन प्रक्रिया के माध्यम से होता है। इसके लिए अभिभावक को राज्य सरकार की आधिकारिक RTE पोर्टल पर जाकर फॉर्म भरना होता है। आवेदन में बच्चे की जानकारी, माता-पिता की आय और अन्य जरूरी दस्तावेज जैसे जन्म प्रमाण पत्र, जाति प्रमाण पत्र (यदि लागू हो), निवास प्रमाण पत्र, आधार कार्ड और पासपोर्ट साइज फोटो अपलोड करना होता है। आवेदन में आसपास के निजी स्कूलों को प्राथमिकता क्रम में चुना जाता है।
अगर एक ही श्रेणी के कई बच्चों के आवेदन एक साथ आते हैं और सीटें सीमित होती हैं, तो चयन लॉटरी सिस्टम के जरिए किया जाता है। आवेदन सही पाए जाने पर ही बच्चे का नाम लॉटरी में डाला जाता है। चयनित बच्चों को स्कूल जाकर एडमिशन कन्फर्म कराना होता है।
RTE के जरिए गरीब और कमजोर वर्ग के बच्चों को अच्छी निजी स्कूलों में पढ़ने का अवसर मिलता है। इससे शिक्षा में समानता बढ़ती है और बच्चों का भविष्य उज्ज्वल होता है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस कानून से सामाजिक असमानता कम करने में मदद मिलती है और हर बच्चा गुणवत्तापूर्ण शिक्षा तक पहुंच सकता है।
वकील महमूद आलम बताते हैं कि RTE के तहत आवेदन ऑनलाइन होने के साथ डायरेक्ट स्कूल से भी फॉर्म लिया जा सकता है। राज्य के नियमों के अनुसार नर्सरी, LKG या पहली कक्षा के लिए उम्र की न्यूनतम और अधिकतम सीमा निर्धारित होती है।
हर साल लाखों बच्चे RTE के तहत निजी स्कूलों में प्रवेश पाते हैं। इस प्रक्रिया के कारण आर्थिक रूप से कमजोर और सामाजिक रूप से वंचित बच्चों को उच्च गुणवत्ता की शिक्षा का अवसर मिलता है, जो उनके जीवन में सकारात्मक बदलाव लाता है।