Union Budget 2026 || Image- Mint File
Union Budget 2026: नयी दिल्ली: वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण रविवार यानी एक फरवरी को अपना रिकॉर्ड नौवां बजट पेश करेंगी जिनमें दो अंतरिम बजट भी शामिल हैं।
आगामी आम बजट में किसी खास राजकोषीय घाटे के आंकड़े को लक्षित करने के बजाय ऋण-जीडीपी अनुपात को कम करने पर जोर दिया जाएगा, जो इस समय लगभग 56 प्रतिशत है। ऐसा इसलिए है क्योंकि देश एफआरबीएम कानून में दिए गए राजकोषीय सुदृढ़ीकरण के मार्ग के लगभग अंत तक पहुंच गया है।
भारत जैसी बढ़ती और विकासशील अर्थव्यवस्था के लिए 3-4 प्रतिशत का राजकोषीय घाटा सहज और उचित माना जाता है, जिसका उद्देश्य वित्तीय स्थिरता के साथ आर्थिक विस्तार को संतुलित करना है। संशोधित राजकोषीय दायित्व और बजट प्रबंधन (एफआरबीएम) अधिनियम के तहत, 2025-26 के लिए राजकोषीय घाटे का लक्ष्य जीडीपी के 4.5 प्रतिशत से नीचे रखा गया था। इसलिए, केंद्र सरकार ने ऋण-जीडीपी अनुपात को एक नया मानक घोषित किया है।
अगले छह साल का मसौदा एक फरवरी, 2025 को जारी एफआरबीएम वक्तव्य में घोषित किया गया था। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने जुलाई, 2024 के अपने बजट भाषण में कहा था, ‘‘मेरे द्वारा 2021 में घोषित राजकोषीय सुदृढ़ीकरण के मार्ग ने हमारी अर्थव्यवस्था की बहुत अच्छी सेवा की है, और हमारा लक्ष्य अगले वर्ष घाटे को 4.5 प्रतिशत से नीचे लाना है। सरकार इस पथ पर बने रहने के लिए प्रतिबद्ध है।’’
उन्होंने कहा था कि 2026-27 के बाद से ‘‘हमारा प्रयास प्रत्येक वर्ष राजकोषीय घाटे को इस तरह रखने का होगा कि केंद्र सरकार का ऋण, जीडीपी के प्रतिशत के रूप में घटते क्रम पर रहे।’’ यह कठोर वार्षिक राजकोषीय लक्ष्यों के बजाय अधिक पारदर्शी और परिचालन रूप से लचीले राजकोषीय मानकों की ओर बदलाव को प्रोत्साहित करता है। इसे राजकोषीय प्रदर्शन के अधिक विश्वसनीय माप के रूप में भी मान्यता दी गई है, क्योंकि यह पिछले और वर्तमान वित्तीय निर्णयों के मिलेजुले प्रभावों को दर्शाता है।
Union Budget 2026: कांग्रेस ने केंद्र सरकार पर नीति निर्धारण में समन्वय की कमी का आरोप लगाते हुए शनिवार को सवाल किया कि क्या बजट के आंकड़ें पेश किए जाने के तुरंत बाद उनमें संशोधन किया जाएगा क्योंकि बजट के कुछ ही दिन बाद सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) और उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई) की नयी शृंखला जारी की जानी है। कांग्रेस के संचार प्रभारी महासचिव जयराम रमेश ने कहा कि वित्त वर्ष 2026-27 का बजट कल यानी रविवार को पेश किया जाएगा। रमेश ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर लिखा, ‘‘ राज्य सरकारें आशंकाग्रस्त होकर प्रतीक्षा कर रही होंगी कि उनके लिए इसमें क्या है क्योंकि वित्त मंत्री 16वें वित्त आयोग की सिफारिशें लागू करने की घोषणा करने वाली हैं।’’
उन्होंने कहा कि वित्त आयोग एक ऐसा निकाय है जिसकी स्थापना संविधान के अनुच्छेद 280 के तहत हर पांच वर्षों में (या उससे पहले) की जाती है ताकि वह केंद्र द्वारा एकत्र किए गए कर राजस्व में राज्यों की हिस्सेदारी, इस हिस्सेदारी का राज्यों के बीच वितरण और पांच वर्षों की अवधि के लिए विशेष अनुदानों की सिफारिश कर सके। उन्होंने कहा कि 16वां वित्त आयोग 2026-27 से 2030-31 तक की अवधि से संबंधित है।
रमेश ने कहा, ‘‘लेकिन इसके अलावा दो और चिंताएं भी हैं। पहली-बजट के कई आंकड़े जीडीपी के प्रतिशत के रूप में प्रस्तुत किए जाएंगे। हालांकि ठीक 26 दिन बाद 27 फरवरी 2026 को 2022-23 को आधार वर्ष मानकर नयी और अद्यतन जीडीपी शृंखला जारी होने वाली है।’’ उन्होंने सवाल किया कि क्या एक फरवरी 2026 को बजट के आंकड़ें पेश किए जाने के तुरंत बाद उनमें संशोधन किया जाएगा? रमेश ने कहा कि दूसरी चिंता यह है कि 2024 को आधार मानकर नयी उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई) शृंखला 12 फरवरी 2026 को जारी होने की संभावना है।
उन्होंने कहा, ‘‘माना जा रहा है कि इस नयी शृंखला में खाद्य कीमतों की हिस्सेदारी में तेज गिरावट दिखाई दे सकती है। अगर ऐसा होता है तो इसका भी बजट के आंकड़ों पर असर पड़ेगा।’’ उन्होंने कहा कि थोक मूल्य सूचकांक (डब्ल्यूपीआई) में भी संशोधन किया जा रहा है और संभवतः इसे आने वाले कुछ महीनों में सार्वजनिक किया जाएगा। रमेश ने कहा कि किसी भी स्थिति में यह नीति-निर्माण में तालमेल की कमी को ही दर्शाता है।