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भोपाल: केंद्रीय बजट के ऐलान के साथ ही मध्य प्रदेश के लिए विकास की नई राह खुलती नजर आ रही है। बजट में राज्य को विभिन्न योजनाओं के तहत करीब 50 हजार करोड़ रुपये मिलने का अनुमान जताया जा रहा है, जिससे प्रदेश के शहरी और ग्रामीण इलाकों में बड़े स्तर पर बदलाव देखने को मिलेंगे। खास बात यह है कि इस बजट में शिक्षा, स्वास्थ्य, महिला सशक्तिकरण, पर्यटन और स्थानीय उद्योगों पर विशेष फोकस किया गया है।
बजट की सबसे अहम घोषणाओं में प्रदेशभर में गर्ल्स हॉस्टल खोलने की योजना शामिल है। सरकार का लक्ष्य है कि मध्य प्रदेश के हर जिले में गर्ल्स हॉस्टल की स्थापना की जाए, ताकि उच्च शिक्षा के लिए दूसरे शहरों में जाने वाली छात्राओं को सुरक्षित और सस्ती आवास सुविधा मिल सके। इससे न सिर्फ लड़कियों की शिक्षा को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि महिला सशक्तिकरण को भी मजबूती मिलेगी।
शहरी विकास के मोर्चे पर भी बजट मध्य प्रदेश के लिए बड़ी राहत लेकर आया है। 5 लाख से अधिक आबादी वाले शहरों को विशेष रूप से विकसित किया जाएगा। इसके तहत टियर-2 और टियर-3 शहरों पर फोकस किया गया है। भोपाल, इंदौर, ग्वालियर, जबलपुर, उज्जैन और सागर जैसे प्रमुख शहरों को आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर, बेहतर परिवहन, स्मार्ट सुविधाएं और रोजगार के नए अवसरों से जोड़ा जाएगा। सरकार का मानना है कि छोटे और मझोले शहरों को मजबूत किए बिना संतुलित विकास संभव नहीं है।
शिक्षा के क्षेत्र में एक नई और अनोखी पहल के तहत प्रदेश के चिन्हित सेकेंडरी स्कूलों और कॉलेजों में कंटेंट क्रिएटर लैब स्थापित की जाएगी। इन लैब्स के जरिए छात्रों को डिजिटल स्किल्स, मीडिया प्रोडक्शन, वीडियो एडिटिंग और ऑनलाइन कंटेंट निर्माण की ट्रेनिंग दी जाएगी, जिससे युवा नई तकनीकों से जुड़कर रोजगार और स्वरोजगार के अवसर तलाश सकेंगे।
स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने के लिए जिला अस्पतालों को अपग्रेड करने की भी व्यवस्था बजट में की गई है। इसके तहत अस्पतालों में आधुनिक उपकरण, बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर और विशेषज्ञ डॉक्टरों की उपलब्धता सुनिश्चित की जाएगी। इससे छोटे शहरों और ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों को बड़े शहरों का रुख नहीं करना पड़ेगा और स्थानीय स्तर पर ही बेहतर इलाज मिल सकेगा।
पर्यटन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से छोटे शहरों और कस्बों में स्थित तीर्थ स्थलों के विकास पर भी ध्यान दिया गया है। सरकार का मानना है कि धार्मिक और सांस्कृतिक पर्यटन से न केवल स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी, बल्कि रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे।
इसके साथ ही “वन जिला वन प्रोडक्ट” योजना को और गति देने का ऐलान किया गया है। इससे प्रत्येक जिले के पारंपरिक और स्थानीय उत्पादों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पहचान मिलेगी, जिससे कारीगरों, किसानों और छोटे उद्यमियों की आय बढ़ेगी।