trade budget/ image source: AmitShah X handle
Trade Budget 2026: नई दिल्ली: 1 फरवरी 2026 की सुबह शेयर बाजार के लाखों ट्रेडर्स के लिए किसी झटके से कम नहीं रही। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने जैसे ही बजट 2026 पेश किया, दलाल स्ट्रीट की नजरें खासतौर पर डेरिवेटिव्स और टैक्स से जुड़े ऐलानों पर टिक गईं। इस बार सरकार ने साफ संकेत दे दिए हैं कि फ्यूचर्स और ऑप्शंस (F&O) से होने वाली कमाई पर अब पहले से ज्यादा सख्ती बरती जाएगी। नतीजा, सिक्योरिटी ट्रांजेक्शन टैक्स (STT) में बढ़ोतरी और बायबैक टैक्स के नियमों में बड़ा बदलाव।
सरकार का तर्क है कि डेरिवेटिव्स मार्केट में बढ़ती सट्टेबाज़ी और बड़े वॉल्यूम को देखते हुए टैक्स स्ट्रक्चर को और मजबूत करना जरूरी है। लेकिन ट्रेडर्स के लिए इसका मतलब है—हर ट्रेड पर बढ़ती लागत और घटता मुनाफा।
STT यानी सिक्योरिटी ट्रांजेक्शन टैक्स वह टैक्स है जो किसी मान्यता प्राप्त स्टॉक एक्सचेंज पर शेयर, म्यूचुअल फंड या F&O की खरीद-बिक्री पर लगाया जाता है। इसकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि चाहे आपको मुनाफा हो या नुकसान, STT हर हाल में देना पड़ता है।
भारत में STT की शुरुआत 1 अक्टूबर 2004 को टैक्स चोरी रोकने और उस समय मौजूद लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन्स टैक्स को खत्म करने के मकसद से की गई थी। हालांकि 2018 में LTCG टैक्स की वापसी हो गई, लेकिन STT को हटाया नहीं गया। अब ट्रेडर्स पर टैक्स का दोहरा बोझ है, एक तरफ कैपिटल गेन्स टैक्स और दूसरी तरफ STT।
मार्केट एक्सपर्ट्स का कहना है कि फ्यूचर्स ट्रेडिंग में मार्जिन और ब्रोकरेज के साथ अब बढ़ा हुआ STT जोड़ने से हाई-फ्रीक्वेंसी ट्रेडर्स पर सीधा असर पड़ेगा।
बजट 2026 का एक और अहम ऐलान शेयर बायबैक को लेकर हुआ है। अब तक बायबैक पर टैक्सेशन के अलग नियम थे, लेकिन अब सरकार ने इसे शेयरधारकों के लिए कैपिटल गेन्स के दायरे में ला दिया है। यानी कंपनी अगर अपने शेयर वापस खरीदती है, तो उस पर होने वाला मुनाफा आपकी होल्डिंग अवधि के हिसाब से STCG या LTCG के तहत टैक्सेबल होगा। इस बदलाव से खासकर वे निवेशक प्रभावित होंगे जो बायबैक को टैक्स-एफिशिएंट एग्जिट ऑप्शन मानते थे।
पिछले कुछ सालों में ट्रेडर्स पर टैक्स का दबाव लगातार बढ़ा है। पहले LTCG को 10% से बढ़ाकर 12.5% किया गया, फिर STCG 15% से बढ़कर 20% हो गया। अब STT में इजाफा होने से कुल ट्रेडिंग कॉस्ट और बढ़ जाएगी।
ट्रेडर्स का कहना है कि छोटे प्रॉफिट वाले ट्रेड अब टैक्स में ही खत्म हो जाएंगे, जिससे एक्टिव ट्रेडिंग की रफ्तार धीमी पड़ सकती है। खासकर रिटेल ट्रेडर्स के लिए यह बजट चुनौतीपूर्ण साबित हो सकता है, जहां हर प्रतिशत लागत सीधे मुनाफे पर असर डालती है।