अमेरिका में 10 प्रतिशत शुल्क से भारतीय उत्पाद होंगे महंगे, अन्य देशों के मुकाबले स्थिति बेहतर: फियो
अमेरिका में 10 प्रतिशत शुल्क से भारतीय उत्पाद होंगे महंगे, अन्य देशों के मुकाबले स्थिति बेहतर: फियो
नयी दिल्ली, 24 जुलाई (भाषा) भारत से आयातित वस्तुओं पर अमेरिका में लगाए गए 10 प्रतिशत अतिरिक्त शुल्क से अमेरिकी बाजार में भारतीय उत्पाद महंगे हो जाएंगे, लेकिन निर्यातकों का मानना है कि इसका असर घोषित शुल्क दर के बजाय वैश्विक प्रतिस्पर्धा के नजरिये से देखा जाना चाहिए।
अमेरिका ने बंधुआ मजदूरी (फोर्स्ड लेबर) के इस्तेमाल को रोकने के प्रयासों के तहत भारत सहित 17 देशों से आने वाले सामान पर 10 प्रतिशत शुल्क लगा दिया है।
भारतीय निर्यात संगठनों के महासंघ (फियो) ने कहा कि इस अतिरिक्त शुल्क से भारतीय उत्पादों की लागत जरूर बढ़ जाएगी, लेकिन इसके वास्तविक असर को प्रतिस्पर्धी देशों की स्थिति के साथ तुलना करके आंका जाना चाहिए।
फियो के अध्यक्ष एस.सी. राल्हन ने कहा कि भारत को 10 प्रतिशत के निचले शुल्क वर्ग में रखा गया है जबकि चीन, वियतनाम, थाईलैंड, तुर्किये, संयुक्त अरब अमीरात, ब्राजील एवं दक्षिण अफ्रीका जैसे कई प्रतिस्पर्धी देशों पर 12.5 प्रतिशत का शुल्क लगाया गया है। इस तरह भारत की स्थिति अपेक्षाकृत बेहतर है।
उन्होंने कहा कि वस्त्र, परिधान, चमड़ा और फुटवियर जैसे श्रम-प्रधान क्षेत्रों में बांग्लादेश, कंबोडिया, पाकिस्तान, श्रीलंका, इंडोनेशिया और मलेशिया जैसे कई प्रतिद्वंद्वी देश भी 10 प्रतिशत शुल्क के दायरे में हैं। ऐसे में इन क्षेत्रों में भारतीय निर्यातकों की प्रतिस्पर्धात्मक बढ़त काफी हद तक बनी रहेगी।
फियो ने निर्यातकों को सलाह दी है कि वे केवल 10 प्रतिशत अतिरिक्त शुल्क के आधार पर निष्कर्ष न निकालें, बल्कि अलग-अलग उत्पाद के हिसाब से अमेरिकी शुल्क, संभावित छूट और प्रतिस्पर्धी देशों पर लागू दरों का विस्तृत आकलन करें।
भाषा प्रेम प्रेम रमण
रमण
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