नयी दिल्ली, 21 अगस्त (भाषा) भारत में 10 प्रतिशत तक चीनी हिस्सेदारी वाली विदेशी कंपनियों को स्वचालित मार्ग से निवेश की अनुमति देने के फैसले के बाद अब तक करीब 4,895.65 करोड़ रुपये के 29 प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) प्रस्ताव मिले हैं। एक अधिकारी ने यह जानकारी दी।
वित्त मंत्रालय ने इस संबंध में विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम (फेमा) के तहत बदलावों को एक मई, 2026 को अधिसूचित किया था।
अधिकारी ने बताया कि ये निवेश सूचना प्रौद्योगिकी, कृत्रिम मेधा (एआई), सूचना एवं संचार, विनिर्माण, औषधि, डेटा सेंटर और परिवहन सेवाओं समेत कई क्षेत्रों में किए गए हैं।
ये 29 निवेश प्रस्ताव मॉरीशस, अमेरिका, कोरिया, जापान, सिंगापुर, लक्जमबर्ग और केमैन द्वीप समेत विभिन्न देशों में स्थित निवेशकों/संस्थाओं से मिले हैं।
अधिकारी ने बताया कि मई में अधिसूचित संशोधित व्यवस्था से ऐसे मामलों में पहले से सरकारी मंजूरी लेने की जरूरत खत्म हो गई है, जिससे भारत में विदेशी निवेश का प्रवाह सुगम और तेज हुआ है।
उन्होंने बताया कि निवेशक इकाई लागू ‘रिपोर्टिंग’ आवश्यकताओं का पालन करते हुए स्वचालित मार्ग से निवेश कर सकती है। इस सुधार से निवेशकों को अधिक निश्चितता मिलती है, लेनदेन में लगने वाला समय घटता है तथा भारत में कारोबार करने में सुगमता और मजबूत होती है।
संशोधनों के अनुसार, चीन या हांगकांग की 10 प्रतिशत तक हिस्सेदारी वाली विदेशी कंपनियां उन क्षेत्रों में भारत में निवेश करने के लिए पात्र होंगी, जहां क्षेत्र संबंधी शर्तों के अधीन स्वचालित मार्ग से एफडीआई की अनुमति है।
एफडीआई नियमों में यह ढील चीन या हांगकांग में पंजीकृत संस्थाओं अथवा भारत के साथ जमीनी सीमा साझा करने वाले अन्य देशों में पंजीकृत संस्थाओं पर लागू नहीं है।
भारत के साथ जमीनी सीमा साझा करने वाले देशों में चीन, पाकिस्तान, बांग्लादेश, नेपाल, भूटान, म्यांमा और अफगानिस्तान शामिल हैं। पहले इन देशों के शेयरधारकों की एक भी शेयर की हिस्सेदारी वाली विदेशी कंपनियों को किसी भी क्षेत्र में भारत में निवेश करने के लिए अनिवार्य रूप से मंजूरी लेनी पड़ती थी।
भाषा निहारिका रमण
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