पश्चिम एशिया से 30 प्रतिशत गैस आपूर्ति बाधित होने से कुछ ग्राहकों को कटौतीः गेल
पश्चिम एशिया से 30 प्रतिशत गैस आपूर्ति बाधित होने से कुछ ग्राहकों को कटौतीः गेल
नयी दिल्ली, पांच मार्च (भाषा) पश्चिम एशिया में जारी सैन्य तनाव और होर्मुज जलडमरूमध्य के रास्ते आयात होने वाली तरल प्राकृतिक गैस (एलएनजी) की आपूर्ति प्रभावित होने के बाद सार्वजनिक क्षेत्र की गैस कंपनी गेल इंडिया लिमिटेड ने कुछ ग्राहकों को गैस आपूर्ति घटाने की योजना बनाई है।
गेल इंडिया ने शेयर बाजार को दी सूचना में कहा कि उसके एलएनजी आपूर्तिकर्ता ने ‘अपरिहार्य स्थिति’ नोटिस जारी किया है। इस नोटिस के जरिये अनुबंध में असाधारण एवं नियंत्रण से बाहर की परिस्थितियों के कारण दायित्व पूरा न कर पाने की आधिकारिक सूचना दी गई है।
ऐसा संभवतः कतर में मौजूद एलएनजी संयंत्रों के कथित तौर पर बंद हो जाने के कारण हुआ है।
गेल इंडिया ने कहा, ‘‘यह नोटिस समुद्री मार्ग पर लगे प्रतिबंधों और जहाजों की आवाजाही में बाधाओं के कारण दिया गया है।… इस वजह से कंपनी को कतर से मिलने वाली एलएनजी की मात्रा चार मार्च, 2026 से शून्य कर दी गई है।’’
कंपनी ने कहा कि इस स्थिति में वह डाउनस्ट्रीम ग्राहकों को गैस आपूर्ति में होने वाली संभावित कटौती का आकलन कर रही है।
पेट्रोलियम मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि सैन्य संघर्ष के कारण होर्मुज जलडमरूमध्य का रास्ता बाधित होने से प्रतिदिन लगभग छह करोड़ मानक घन मीटर गैस की आपूर्ति बाधित हुई है।
भारत की कुल गैस खपत प्रतिदिन करीब 19.5 करोड़ मानक घन मीटर है। इसका उपयोग बिजली उत्पादन, उर्वरक विनिर्माण, परिवहन में सीएनजी, घरेलू रसोई गैस और औद्योगिक इकाइयों में किया जाता है।
अधिकारी ने संकेत दिया कि बदले हुए हालात में गैस आपूर्ति को प्राथमिकता के आधार पर नए सिरे से व्यवस्थित किया जा सकता है। आगामी बुवाई सीजन को देखते हुए उर्वरक जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों को पहले गैस दी जाएगी।
होर्मुज के जरिये एलएनजी की आपूर्ति 28 फरवरी से ही रुक गई है। इससे लगभग 20 प्रतिशत वैश्विक एलएनजी आपूर्ति अस्थायी रूप से प्रभावित हुई है और एशियाई आयात बाजारों में चिंता बढ़ गई है।
भारत की एलएनजी आपूर्ति का एक बड़ा हिस्सा कतर और संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) से होर्मुज जलडमरूमध्य के रास्ते ही आता है। बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि अगर ईरान संकट लंबा खिंचता है तो भारत को महंगे स्पॉट कार्गो खरीदने पड़ सकते हैं या कुछ उपभोक्ताओं को खपत कम करनी पड़ सकती है।
गैस की वैकल्पिक आपूर्ति अमेरिका, पश्चिम अफ्रीका, ऑस्ट्रेलिया या रूस से आ सकती है, लेकिन यात्रा की लंबी दूरी के कारण परिवहन लागत बढ़ सकती है और इसमें लगने वाला समय भी लंबा हो सकता है।
उद्योग सूत्रों ने कहा कि सरकार फिलहाल महत्वपूर्ण क्षेत्रों को प्राथमिकता देने और वैकल्पिक स्रोतों से गैस उपलब्ध कराने की रणनीति पर काम कर रही है।
भाषा प्रेम
प्रेम अजय
अजय

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