(8th Pay Commission/ Image Credit: AI-generated)
नई दिल्ली: 8th Pay Commission: 8वें वेतन आयोग को लेकर केंद्र सरकार के कर्मचारियों और पेंशनर्स की उम्मीदें लगातार बढ़ रही हैं। जस्टिस रंजना देसाई की अध्यक्षता में गठित यह आयोग (8th Pay Commission) देश के अलग-अलग राज्यों में जाकर कर्मचारी और पेंशनर्स संगठनों से सुझाव ले रहे हैं। कर्मचारी संगठनों ने आयोग के सामने 3.83 फिटमैंट फैक्टर लागू करने की मांग रखी है। उनका कहना है कि यदि मांग स्वीकार होती है तो कर्मचारियों की बेसिक सैलरी में बड़ा इजाफा हो सकता है। हालांकि, आयोग ने अभी तक फिटमैंट फैक्टर या नई बेसिक सैलरी को लेकर कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की है।
यदि 3.83 फिटमेंट फैक्टर लागू किया जाता है तो मौजूदा न्यूनतम बेसिक पे 18,000 रुपये बढ़कर करीब 68,940 रुपये तक पहुंच सकता है यानी बेसिक वेतन में लगभग 283 प्रतिशत की बढ़ोतरी संभव माना जा रहा है। लेकिन यह केवल कर्मचारी संगठनों की मांग पर आधारित अनुमान है। अंतिम फैसला आयोग (8th Pay Commission) की सिफारिशों और केंद्र सरकार की मंजूरी के बाद ही होगा। आयोग के निर्णय का असर करीब 50 लाख केंद्रीय कर्मचारियों और 70 लाख पेंशनर्स पर पड़ सकता है।
फिटमेंट फैक्टर वह गुणांक होता है जिसके आधार पर कर्मचारियों की नई बेसिक सैलरी तय की जाती है। 7वें वेतन आयोग (7th Pay Commission) में यह 2.57 था। जिसके बाद न्यूनतम बेसिक वेतन 7,000 रुपये से बढ़कर 18,000 रुपये हो गया था। इस बार कर्मचारी संगठन न्यूनतम 69,000 रुपये बेसिक पे, पुरानी पेंशन योजना की बहाली और मकान किराया भत्ता (HRA) में भी बढ़ोतरी की मांग कर रहे हैं। इन मांगों पर आयोग सभी पक्षों से चर्चा कर रहा है।
8वां वेतन आयोग (8th Pay Commission) अब तक दिल्ली, जम्मू-कश्मीर और लखनऊ समेत कई जगहों पर बैठकें कर चुका है। इन बैठकों में कर्मचारी संगठनों और पेंशनर्स के प्रतिनिधियों से सुझाव लिए जा रहे हैं। आयोग का गठन नवंबर 2025 में किया गया था और इसे अपनी रिपोर्ट तैयार करने के लिए 18 महीने का समय दिया गया है। रिपोर्ट मिलने के बाद केंद्र सरकार सिफारिशों की समीक्षा करेगी और उसी के आधार पर कर्मचारियों के वेतन तथा पेंशन पर अंतिम फैसला लिया जाएगा।