मुंबई, 11 फरवरी (भाषा) सेबी के चेयरमैन तुहिन कांत पांडेय ने बुधवार को कहा कि पिछले कुछ समय में हुए विकास के बावजूद, पूंजी बाजार के नजरिये से लघु एवं मझोले उद्यम (एसएमई) क्षेत्र की पहुंच अभी भी सीमित बनी हुई है।
पांडेय ने यहां इंडिया एसएमई वित्तपोषण और निवेश शिखर सम्मेलन में कहा कि सूचीबद्धता से ऐसी छोटी कंपनियों में संचालन व्यवस्था बेहतर हो सकती है। उन्होंने यह भी कहा कि नियामक संस्था को अतीत में इस मोर्चे पर कुछ चुनौतियों का सामना करना पड़ा है।
उन्होंने कहा, ‘‘भारत की क्षमता के मुकाबले एसएमई पूंजी बाजार अभी भी सीमित बना हुआ है….। कंपनियां पूंजी बाजारों से अपरिचित होने और मर्चेंट बैंकरों तक सीमित पहुंच के कारण बाजार में आने से हिचकिचाती हैं।’’
पिछले कुछ वर्षों में सूचीबद्धता में हुई प्रगति का जिक्र करते हुए पांडेय ने कहा कि आरंभिक सार्वजनिक निर्गम (आईपीओ) के माध्यम से पूंजी जुटाने की लागत भी एक बाधा हो सकती है।
उन्होंने कहा कि ऐसी कंपनियां खुलासा और अनुपालन को ‘बोझिल’ मानती हैं और दस्तावेज दाखिल करने संबंधी व्यावहारिक मार्गदर्शन अक्सर अस्पष्ट होता है।
सेबी प्रमुख ने बाजार से पूंजी जुटाने की आवश्यकता पर जोर देते हुए कहा कि ऐसा कदम संचालन व्यवस्था को बेहतर बनाता है, जिससे पूंजी की लागत कम हो सकती है क्योंकि बाजार विश्वसनीयता को पुरस्कृत करते हैं।
उन्होंने कहा, ‘‘कुछ समय पहले, बाजार से पूंजी प्राप्त करने में एक और बाधा तब उत्पन्न हुई जब कुछ एसएमई ने एसएमई ढांचे के तहत उपलब्ध रियायतों का दुरुपयोग किया। ऐसे मामलों ने एसएमई आईपीओ में निवेशकों के भरोसे को बुरी तरह प्रभावित किया।’’
पांडेय ने कहा कि ऐसे भी मामले सामने आए जहां कुछ एसएमई ने सकारात्मक माहौल बनाने और निवेशकों को अपने शेयर खरीदने के लिए प्रेरित करने को अनुचित व्यापार गतिविधियों का सहारा लिया। उन्होंने यह भी बताया कि सेबी और शेयर बाजार दोनों ने इस पर सुधार किया है।
उन्होंने कहा कि 1,400 कंपनियां अलग से बनाये गये एसएमई स्टॉक एक्सचेंज पर सूचीबद्ध हैं और उनका कुल बाजार पूंजीकरण 4.1 लाख करोड़ रुपये है। इनमें से 350 से अधिक कंपनियां मुख्य शेयर बाजार में स्थानांतरित हो चुकी हैं।
पांडेय ने कहा कि पिछले वित्त वर्ष में कंपनियों ने 98 आईपीओ के माध्यम से 9,800 करोड़ रुपये जुटाए। यह वित्त वर्ष 2025-26 में जनवरी तक 232 सूचीबद्धता के साथ बढ़कर 10,500 करोड़ रुपये हो गया है।
उन्होंने छोटे और मझोले उद्यमों (एसएमई) द्वारा शेयर बाजार के माध्यम से कर्ज जुटाने को स्वागत योग्य कदम बताया।
हालांकि, पांडेय ने कहा कि पश्चिमी क्षेत्र से आईपीओ का अधिक चलन है। वित्त वर्ष 2025-26 में इस क्षेत्र का आईपीओ में 44 प्रतिशत हिस्सा था।
उन्होंने गुणवत्तापूर्ण एसएमई की भागीदारी बढ़ाने के लिए पारंपरिक केंद्रों से परे व्यापक पहुंच की आवश्यकता पर जोर दिया।
भाषा रमण अजय
अजय