एलएनजी आपूर्ति बाधित होने के बाद अदाणी-टोटल गैस ने औद्योगिक गैस की कीमतें तीन गुना कीं

एलएनजी आपूर्ति बाधित होने के बाद अदाणी-टोटल गैस ने औद्योगिक गैस की कीमतें तीन गुना कीं

एलएनजी आपूर्ति बाधित होने के बाद अदाणी-टोटल गैस ने औद्योगिक गैस की कीमतें तीन गुना कीं
Modified Date: March 5, 2026 / 07:52 pm IST
Published Date: March 5, 2026 7:52 pm IST

नयी दिल्ली, पांच मार्च (भाषा) अदाणी समूह और फ्रांस की ‘टोटलएनर्जीज’ के संयुक्त उद्यम अदाणी टोटल गैस लिमिटेड ने बड़े औद्योगिक उपभोक्ताओं के लिए गैस कीमतें तीन गुना कर दी हैं। सूत्रों ने यह जानकारी दी।

पश्चिम एशिया के संघर्ष के कारण होर्मुज जलडमरूमध्य से होने वाली आपूर्ति रुकने के बाद कंपनी ने यह कड़ा कदम उठाया है।

सूत्रों के मुताबिक, कंपनी ने औद्योगिक गैस की कीमत 40 रुपये प्रति मानक घन मीटर से बढ़ाकर करीब 119 रुपये प्रति मानक घन मीटर कर दी है। अनुबंधित एलएनजी की आपूर्ति कम होने के कारण कंपनी को महंगे वैकल्पिक स्रोतों से गैस लेनी पड़ रही है।

हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य एक संकीर्ण समुद्री मार्ग है, जिससे दुनिया के लगभग पांचवें हिस्से का कच्चा तेल और बड़ी मात्रा में एलएनजी गुजरती है। अमेरिका और इज़राइल के हमलों तथा ईरान की जवाबी कार्रवाई के बाद इस मार्ग से जहाजों की आवाजाही लगभग रुक गई है।

ड्रोन और मिसाइल हमलों के बाद कतर को अपने एलएनजी संयंत्र बंद करने पड़े। वहीं, हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य बंद होने के कारण भारतीय खरीदार कतर तक जहाज नहीं भेज पा रहे हैं।

भारत के सबसे बड़े गैस आपूर्तिकर्ता कतरएनर्जी से एलएनजी आपूर्ति प्रभावित होने के कारण कई औद्योगिक उपभोक्ताओं और शहर गैस वितरण कंपनियों को गैस की आपूर्ति कम करनी पड़ी है। प्रभावित उपभोक्ता अब ऐसे वैकल्पिक ईंधन का उपयोग कर रहे हैं जिनकी कीमत सामान्य दर से दोगुनी से भी अधिक है।

कंपनी ने कहा कि हाल के भू-राजनीतिक घटनाक्रमों के कारण एलएनजी आपूर्ति मार्ग प्रभावित हुए हैं, जिससे उसे गैस की आपूर्ति में कटौती का सामना करना पड़ा और परिचालन में कठिनाइयां पैदा हुईं।

पश्चिम एशिया के देश दुनिया के लगभग 30 प्रतिशत कच्चे तेल और 20 प्रतिशत एलएनजी का उत्पादन करते हैं, जिनमें से अधिकांश हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य से होकर गुजरता है।

भारत अपनी जरूरत का लगभग 88 प्रतिशत कच्चा तेल और करीब आधी एलएनजी आयात करता है। इनमें से 40-50 प्रतिशत तेल और 50-60 प्रतिशत एलएनजी की आपूर्ति इसी मार्ग से होती है।

यह समुद्री मार्ग सबसे संकीर्ण स्थान पर लगभग 21 समुद्री मील चौड़ा है, जबकि जहाजों के लिए वास्तविक मार्ग इससे भी संकरा है।

संघर्ष के कारण ऊर्जा की कीमतों में भी तेजी आई है। कच्चे तेल का अंतरराष्ट्रीय मानक ब्रेंट क्रूड जनवरी-फरवरी, 2026 के औसत 66-67 डॉलर प्रति बैरल से बढ़कर लगभग 84 डॉलर प्रति बैरल हो गया है।

भाषा योगेश अजय

अजय


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