मुंबई, सात जून (भाषा) मुंबई का चर्चित ‘डब्बावाला’ नेटवर्क ‘वर्क फ्रॉम होम’ (घर से काम करने) की संस्कृति, ऑनलाइन ऑर्डर पर खाने पहुंचाने वाले मंच और क्लाउड किचन के उभार से गंभीर रूप से प्रभावित हुआ है।
‘मुंबई टिफिन बॉक्स सप्लायर्स एसोसिएशन’ के अनुसार, डब्बावालों के कार्यबल में लगभग 40 प्रतिशत की गिरावट आई है। महामारी से पहले जहां इनकी संख्या करीब 5,000 थी, वहीं अब यह घटकर लगभग 3,000 रह गई है। काम कम होने से कई डब्बावाले पैतृक गांवों को लौट गए, जबकि कई अन्य व्यवसायों में चले गए।
यह नेटवर्क हमेशा से बेहद लोकप्रिय रहा है क्योंकि मुख्य रूप से पुणे जिले के मावल, जुन्नर, आंबेगाव, राजगुरुनगर, हवेली और मुलशी तालुका से आने वाले ये डब्बावाले मुंबई के भारी याातयात, भीड़भाड़ और भारी बारिश के बावजूद समय पर टिफिन पहुंचाने के लिए जाने जाते हैं।
इनकी इसी खूबी के कारण वर्ष 1998 में प्रतिष्ठित ‘फोर्ब्स’ पत्रिका ने इसकी तुलना ‘सिक्स सिग्मा’ गुणवत्ता मानकों से की थी। वर्ष 2003 में यह नेटवर्क तब अंतरराष्ट्रीय सुर्खियों में आया, जब ब्रिटेन के तत्कालीन प्रिंस चार्ल्स (अब किंग चार्ल्स तृतीय) ने मुंबई में इनसे मुलाकात कर इनकी समयबद्धता की सराहना की थी।
एसोसिएशन के अध्यक्ष रामदास कारवंडे ने कहा, ‘कोविड के समय लॉकडाउन के दौरान हमारा परिचालन पूरी तरह ठप हो गया था। स्थिति सामान्य होने के बाद भी ग्राहकों की संख्या पुरानी स्थिति में नहीं लौटी है।’
उन्होंने बताया कि काम करने की हाइब्रिड और ‘वर्क फ्रॉम होम’ व्यवस्था के कारण रोजाना ले जाए जाने वाले टिफिन की संख्या में काफी कमी आई है।
हालांकि, उन्होंने भरोसा जताया कि अगले एक-दो वर्षों में इनकी संख्या फिर बढ़ेगी।
भाषा योगेश अजय
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