नयी दिल्ली, सात जून (भाषा) स्थानीय शेयर बाजार की दिशा इस सप्ताह पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव, कच्चे तेल की कीमतों पर इसके प्रभाव और विदेशी निवेशकों की कारोबारी गतिविधियों पर निर्भर करेगी। विश्लेषकों ने यह राय व्यक्त की है।
एक विशेषज्ञ ने कहा कि सप्ताहांत में अमेरिकी बाजारों में आई भारी गिरावट के बाद कारोबारी सप्ताह की शुरुआत सतर्कता के साथ हो सकती है।
इसके अलावा मानसून और मुद्रास्फीति के आंकड़ों की घोषणा भी महत्वपूर्ण कारक होंगे जिन पर नजर रखनी होगी।
रेलिगेयर ब्रोकिंग के शोध प्रमुख अजित मिश्रा ने कहा, ‘‘इस सप्ताह बाजार की दिशा प्रमुख मुद्रास्फीति और वैश्विक व्यापक आर्थिक आंकड़ों से तय होगी। भारत में निवेशक 12 जून को जारी होने वाले मई माह के मुद्रास्फीति के आंकड़ों और विदेशी मुद्रा भंडार आंकड़ों पर बारीकी से नजर रखेंगे।’’
मिश्रा ने कहा, ‘‘वैश्विक स्तर पर अमेरिका-ईरान वार्ता और कच्चे तेल की कीमतें, मुद्रा का उतार-चढ़ाव और समग्र जोखिम लेने की धारणा पर पड़ने वाले प्रभाव पर निवेशकों की नजर रहेगी।’’
अमेरिकी बाजार शुक्रवार को भारी गिरावट के साथ बंद हुए, नैस्डैक कंपोजिट में 4.18 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। एसएंडपी 500 में 2.64 प्रतिशत और डाउ जोन्स इंडस्ट्रियल एवरेज में 1.35 प्रतिशत की गिरावट आई।
स्वस्तिका इन्वेस्टमार्ट लिमिटेड के शोध प्रमुख संतोष मीणा ने कहा, ‘‘वैश्विक बाजारों, विशेष रूप से एआई (कृत्रिम मेधा) से संबंधित प्रौद्योगिकी शेयरों में आई भारी गिरावट के बाद आने वाले सप्ताह के दौरान निवेशकों के अधिक सतर्कता बरतने की संभावना है। सकारात्मक पक्ष देखें तो, घरेलू बाजारों को कुछ सहायक कारक मिल रहे हैं, जैसे कि मजबूत सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) की वृद्धि के आंकड़े, आरबीआई की नीतिगत घोषणा के बाद रुपये में मजबूती और कच्चे तेल की कीमतों में उल्लेखनीय गिरावट।’’
उन्होंने कहा कि अमेरिका-ईरान घटनाक्रम बेहद अनिश्चित बने हुए है और वैश्विक बाजारों में अस्थिरता पैदा कर रहे हैं।
पिछले सप्ताह बीएसई का सेंसेक्स 532.4 अंक यानी 0.71 प्रतिशत और एनएसई निफ्टी 181.05 अंक यानी 0.76 प्रतिशत टूटा था।
लाइवलॉन्ग वेल्थ के संस्थापक एवं शोध विश्लेषक हरिप्रसाद के. ने कहा, ‘‘नैस्डैक में चार प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई, जो अप्रैल, 2025 के बाद से एक दिन में सबसे बड़ी गिरावट है। निवेशकों ने सेमीकंडक्टर और प्रौद्योगिकी शेयरों में अपना निवेश तेजी से कम किया है। भारतीय सूचकांकों में आईटी शेयरों का महत्वपूर्ण हिस्सा होने के कारण यह कमजोरी घरेलू बाजारों पर भी असर डाल सकती है और सप्ताह के शुरुआती दिनों में बाजार की धारणा पर दबाव बनाए रख सकती है।’’
भाषा यासिर अजय
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