नयी दिल्ली, सात जून (भाषा) भारतीय कंपनियों को वर्ष 2005 से 2024 के दौरान चीनी फर्मों की तुलना में काफी कम सरकारी सहायता प्राप्त हुई है। आर्थिक सहयोग एवं विकास संगठन (ओईसीडी) की एक रिपोर्ट में यह जानकारी दी गई है।
‘ओईसीडी मैजिक डेटाबेस ऑफ इंडस्ट्रियल सब्सिडीज’ यह आकलन करता है कि कंपनियों को वास्तव में क्या प्राप्त होता है (न कि सरकारें क्या खुलासा करती हैं)। इसमें 2005-24 के दौरान 15 प्रमुख क्षेत्रों में दुनिया की 525 सबसे बड़ी विनिर्माता कंपनियों का अनुदान, आयकर रियायतें और बाजार दर से कम ब्याज पर ऋण, इन तीन साधनों के माध्यम से आकलन किया गया है।
रिपोर्ट में कहा गया, ‘‘2005 और 2024 के बीच, चीनी कंपनियों को ओईसीडी देशों में स्थित कंपनियों की तुलना में औसतन तीन से आठ गुना अधिक सरकारी सहायता प्राप्त हुई, जो एक न्यूनतम अनुमान है। ये अनुदान ब्राजील, भारत और इंडोनेशिया जैसी गैर-ओईसीडी अर्थव्यवस्थाओं में स्थित कंपनियों को प्राप्त सहायता से भी काफी अधिक था।’’
ओईसीडी एक अंतर-सरकारी निकाय है जिसमें मुख्य रूप से 38 विकसित अर्थव्यवस्थाएं शामिल हैं। यह सदस्य देशों के बीच आर्थिक वृद्धि, व्यापार, निवेश और नीति समन्वय को बढ़ावा देने के लिए काम करता है। इसके सदस्यों में अमेरिका, ब्रिटेन, कनाडा, जर्मनी, फ्रांस, इटली, जापान, दक्षिण कोरिया और ऑस्ट्रेलिया जैसे देश शामिल हैं।
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि 2005 और 2023 के बीच विकास करने वाली कंपनियों के वैश्विक बाजार हिस्सेदारी में हुई वृद्धि का लगभग 22 प्रतिशत हिस्सा उन्हें प्राप्त अनुदान के कारण है।
रिपोर्ट के अनुसार, चीनी कंपनियों के मामले में उनकी वैश्विक बाजार हिस्सेदारी में हुई लगभग 60 प्रतिशत वृद्धि को उन्हें मिली सरकारी सहायता से जोड़ा जा सकता है।
भाषा यासिर अजय
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