नयी दिल्ली, 18 जनवरी (भाषा) बाजार प्रतिभागियों ने 2026-27 के आम बजट से पहले सरकार से पूंजी बाजार कराधान को आसान बनाने का आग्रह किया है, जिसमें दीर्घकालिक पूंजीगत लाभ (एलटीसीजी) पर उच्च छूट सीमा की मांग शामिल है।
उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि सरकार को लेनदेन करों में और वृद्धि करने से बचना चाहिए। आम बजट एक फरवरी को वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा पेश किया जाएगा।
बाजार के हितधारकों ने खुदरा और दीर्घकालिक निवेशकों को अधिक राहत देने के लिए इक्विटी निवेश से होने वाले दीर्घकालिक पूंजीगत लाभ पर कर मुक्त छूट सीमा को बढ़ाने की मांग की है।
जेएम फाइनेंशियल सर्विसेज ने कहा कि सरकार को इक्विटी एलटीसीजी के लिए कर-मुक्त छूट सीमा को 1.25 लाख रुपये से बढ़ाकर दो लाख रुपये करना चाहिए।
कंपनी ने जटिलता को कम करने और कर स्पष्टता में सुधार के लिए इक्विटी, डेट, सोना और रियल एस्टेट सहित सभी परिसंपत्ति वर्गों में ‘दीर्घकालिक’ की परिभाषा को 12 महीने के रूप में मानकीकृत करने की भी मांग की है। इसके अतिरिक्त, इसने पूंजीगत हानि को अन्य मदों के तहत होने वाली आय के साथ समायोजित करने की अनुमति देने की मांग भी की है।
बाजार प्रतिभागियों ने लेनदेन से संबंधित करों में किसी भी तरह की और वृद्धि के खिलाफ चेतावनी दी है। एचडीएफसी सिक्योरिटीज के प्रबंध निदेशक और मुख्य कार्यकारी अधिकारी धीरज रेली ने कहा कि हितधारकों ने सट्टा कारोबार के बजाय दीर्घकालिक निवेश को प्रोत्साहित करने के लिए नकद इक्विटी सौदों पर प्रतिभूति लेनदेन कर (एसटीटी) को डेरिवेटिव की तुलना में कम रखने का प्रस्ताव दिया है।
उन्होंने शेयर पुनर्खरीद के केवल लाभ वाले हिस्से पर कर लगाने और घरेलू निवेशकों के लिए लाभांश कर की दरों को अनिवासी भारतीयों पर लागू होने वाली दरों के अनुरूप बनाने का भी सुझाव दिया।
भाषा पाण्डेय
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