एएचपीआई ने स्वास्थ्य बीमा कंपनियों लिए की ‘सिबिल’ जैसी रेटिंग की मांग

एएचपीआई ने स्वास्थ्य बीमा कंपनियों लिए की ‘सिबिल’ जैसी रेटिंग की मांग

एएचपीआई ने स्वास्थ्य बीमा कंपनियों लिए की ‘सिबिल’ जैसी रेटिंग की मांग
Modified Date: January 5, 2026 / 04:37 pm IST
Published Date: January 5, 2026 4:37 pm IST

नयी दिल्ली, पांच जनवरी (भाषा) अस्पतालों, क्लिनिक आदि का प्रतिनिधित्व करने वाले एसोसिएशन ऑफ हेल्थकेयर प्रोवाइडर्स इंडिया (एएचपीआई) की एक इकाई ने स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र में पारदर्शिता एवं जवाबदेही लाने के लिए बीमाकर्ताओं तथा टीपीए (थर्ड पार्टी एडमिनिस्ट्रेटर) के लिए ‘सिबिल’ जैसी रेटिंग प्रणाली स्थापित करने का आह्वान किया है।

सिबिल-जैसी रेटिंग रूपरेखा से आशय ऐसी प्रणाली से है जो किसी इकाई की साख या जोखिम स्तर को आकलन करने के लिए तैयार किया जाता है। इसमें सिबिल (क्रेडिट इंफॉर्मेशन ब्यूरो (इंडिया) लिमिटेड) द्वारा उपयोग किए जाने वाले मापदंडों के समान मानदंडों का उपयोग करके किसी संस्था की साख या जोखिम स्तर का आकलन किया जाता है।

एएचपीआई की पश्चिम उत्तर प्रदेश की इकाई ने सोमवार को बयान स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र में ‘सिबिल’ जैसी रेटिंग प्रणाली स्थापित करने का आह्वान किया।

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बयान के अनुसार, एएचपीआई की पश्चिम उप्र की इकाई के अध्यक्ष डॉ. अनुराग मेहरोत्रा ​​ने कहा, ‘‘ बैंक और गैर-बैंकिंग वित्तीय क्षेत्र में ‘सिबिल स्कोर’ पारदर्शिता और जवाबदेही के लिए एक स्पष्ट मानदंड प्रदान करते हैं। स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र में भी इसी तरह की व्यवस्था होनी चाहिए। बीमा कंपनियों और टीपीए का वर्तमान व्यवहार काफी हद तक अपारदर्शी बना हुआ है।’’

उन्होंने कहा, ‘‘ एक मानकीकृत रेटिंग प्रणाली मरीजों को सोच-विचार कर विकल्प चुनने में सक्षम बनाएगी और यह सुनिश्चित करेगी कि अस्पतालों को देखभाल प्रदान करने में निष्पक्ष भागीदार के रूप में माना जाए। इस तरह की व्यवस्था से मरीजों को भी काफी लाभ होगा।’’

एएचपीआई के महानिदेशक डॉ. गिरधर ज्ञानी ने कहा कि एचपीआई एक भरोसेमंद और तथ्य-आधारित मंच के रूप में उभर रहा है।

उन्होंने देश में अस्पताल बिस्तरों की कमी की ओर ध्यान दिलाते हुए क्षमता विस्तार और आयुष्मान भारत जैसी योजनाओं के तहत समय पर भुगतान को अस्पतालों की स्थिरता के लिए जरूरी बताया।

भाषा निहारिका रमण

निहारिका


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