टाटा समूह में नेतृत्व विवाद के बीच श्रीनिवासन ने चैरिटी कमिश्नर से जांच की मांग की

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टाटा समूह में नेतृत्व विवाद के बीच श्रीनिवासन ने चैरिटी कमिश्नर से जांच की मांग की

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  • Publish Date - September 30, 2026 / 04:37 PM IST,
    Updated On - September 30, 2026 / 04:37 PM IST

मुंबई, 30 सितंबर (भाषा) टाटा समूह में छिड़े नेतृत्व विवाद के बीच टाटा संस के नामित निदेशक एवं ट्रस्टी वेनु श्रीनिवासन ने सर दोराबजी टाटा ट्रस्ट (एसडीटीटी) के संचालन और प्रशासन को लेकर महाराष्ट्र के चैरिटी कमिश्नर से नियामकीय जांच की मांग की है।

श्रीनिवासन ने चैरिटी कमिश्नर को लिखे पत्र में एसडीटीटी के स्थायी ट्रस्टी के रूप में नोएल एन. टाटा की नियुक्ति एवं मौजूदा स्थिति, नोएल टाटा के बेटे नेविल एन. टाटा की नियुक्ति और टाटा संस के निदेशक के रूप में अपनी स्वतंत्र भूमिका को सीमित करने के प्रयासों पर सवाल उठाए हैं।

श्रीनिवासन की शिकायत ऐसे समय आई है जब टाटा संस के नेतृत्व, कंपनी की शेयर बाजार में संभावित सूचीबद्धता और टाटा ट्रस्ट के अधिकारों को लेकर विवाद गहरा गया है। सर दोराबजी टाटा ट्रस्ट समेत टाटा के न्यासों के पास टाटा संस की करीब 66 प्रतिशत हिस्सेदारी है।

श्रीनिवासन ने आरोप लगाया है कि 16 सितंबर को एसडीटीटी की ओर से जारी प्रस्ताव के जरिये उन्हें टाटा संस की प्रस्तावित सूचीबद्धता से जुड़े मामलों में भाग लेने और मतदान करने से रोकने का प्रयास किया गया। उन्होंने कहा है कि यह उनकी स्वतंत्र राय और मतदान के अधिकार को सीमित करने की कोशिश थी।

इसके अगले दिन टाटा संस के निदेशक मंडल की बैठक में श्रीनिवासन ने मौजूदा चेयरमैन एन. चंद्रशेखरन की तीसरे कार्यकाल के लिए पुनर्नियुक्ति और कंपनी की सूचीबद्धता की प्रक्रिया आगे बढ़ाने के प्रस्ताव का समर्थन किया था। वहीं, टाटा ट्रस्ट के चेयरमैन नोएल टाटा ने दोनों प्रस्तावों का विरोध किया था।

समूह की होल्डिंग कंपनी टाटा संस के निदेशक मंडल ने इन प्रस्तावों को मंजूरी दे दी थी। चंद्रशेखरन की पुनर्नियुक्ति का प्रस्ताव निर्णायक मत के जरिये पारित हुआ था। बाद में टाटा ट्रस्ट ने इन फैसलों की वैधता पर सवाल उठाए।

श्रीनिवासन ने अपनी शिकायत में टाटा ट्रस्ट और एसडीटीटी की ओर से टाटा संस के व्यावसायिक मामलों में बढ़ती भागीदारी पर भी सवाल उठाया है। उन्होंने कहा कि एक सार्वजनिक धर्मार्थ ट्रस्ट की टाटा संस में बड़ी हिस्सेदारी होने का मतलब यह नहीं होना चाहिए कि वह कंपनी के व्यावसायिक एवं रणनीतिक मामलों में सीधे दखल दे।

उन्होंने खासकर टाटा संस से जुड़े वाणिज्यिक लेनदेन और शापूरजी पालोनजी समूह के लिए तरलता से जुड़े एक प्रस्ताव में ट्रस्ट के चेयरमैन और उसके संचालन दल की भूमिका का उल्लेख किया है।

श्रीनिवासन ने एसडीटीटी के प्रशासन और संचालन की तत्काल जांच की मांग की है। उन्होंने नोएल टाटा को एसडीटीटी की उन बैठकों या परिपत्र प्रस्तावों से अलग रखने के निर्देश देने की भी मांग की है, जिनमें टाटा संस की आम बैठकों के लिए ट्रस्ट की ओर से निदेशक, प्रतिनिधि या प्रॉक्सी की नियुक्ति, नामांकन या उन्हें निर्देश देने से जुड़े फैसले किए जाएं।

भाषा प्रेम प्रेम अजय

अजय