अनिल अग्रवाल का दावा, लिखित पुष्टि मिलने के बावजूद जेपी समूह की संपत्ति की बोली पर पलटा गया फैसला

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अनिल अग्रवाल का दावा, लिखित पुष्टि मिलने के बावजूद जेपी समूह की संपत्ति की बोली पर पलटा गया फैसला

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  • Publish Date - March 29, 2026 / 03:22 PM IST,
    Updated On - March 29, 2026 / 03:22 PM IST

नयी दिल्ली, 29 मार्च (भाषा) खनन उद्योग के दिग्गज कारोबारी अनिल अग्रवाल ने रविवार को दावा किया कि उनकी कंपनी वेदांता को जेपी समूह की संपत्ति की बोली जीतने की लिखित पुष्टि मिल गई थी, लेकिन बाद में यह फैसला बदल दिया गया।

हालांकि, उन्होंने इसके कारणों पर विस्तार से कोई जानकारी नहीं दी।

अग्रवाल ने सोशल मीडिया पर कहा कि वेदांता को दिवालिया प्रक्रिया के तहत जयप्रकाश एसोसिएट्स लिमिटेड (जेएएल) को खरीदने के लिए सार्वजनिक रूप से सबसे ऊंची बोली लगाने वाला घोषित किया गया था।

उन्होंने बताया कि उन्हें लिखित रूप में यह जानकारी दी गई थी कि उनकी कंपनी बोली जीत चुकी है, लेकिन कुछ दिन बाद यह निर्णय बदल दिया गया।

जेपी समूह की इस प्रमुख कंपनी के लिए बोली में गौतम अदाणी का समूह ही दूसरा बड़ा दावेदार था। ऋणदाताओं की समिति (सीओसी) ने दोनों कंपनियों की बोलियों का मूल्यांकन किया और बाद में अदाणी समूह की बोली को मंजूरी के लिए राष्ट्रीय कंपनी विधि न्यायाधिकरण (एनसीएलटी) में भेज दिया।

एनसीएलटी की इलाहाबाद पीठ ने अदाणी समूह की बोली को मंजूरी दे दी, जिसके खिलाफ वेदांता समूह ने राष्ट्रीय कंपनी विधि अपीलीय न्यायाधिकरण (एनसीएलएटी) में चुनौती दी है।

हाल ही में हुई सुनवाई में एनसीएलएटी ने एनसीएलटी के फैसले पर रोक लगाने से इनकार कर दिया और मामले की अगली सुनवाई 10 अप्रैल को तय की गई है।

अग्रवाल ने कहा कि वह इस फैसले में बदलाव के कारणों पर ज्यादा कुछ नहीं कहना चाहते और यह मामला उचित मंच पर तय होगा।

उन्होंने यह भी कहा कि यह मामला उन्हें जेपी समूह के संस्थापक जयप्रकाश गौड़ के साथ हुई बातचीत की याद दिलाता है, जिन्होंने इच्छा जताई थी कि उनकी संपत्तियां सुरक्षित हाथों में जाएं।

उन्होंने कहा, ‘‘हमें इस संपत्ति से कोई लगाव नहीं है। अगर यह हमें मिलती है तो यह ईश्वर की कृपा है, और अगर नहीं मिलती तो वह भी उसकी इच्छा है।’’

जयप्रकाश एसोसिएट्स लिमिटेड (जेएएल) को जून, 2024 में दिवालिया प्रक्रिया में शामिल किया गया था, क्योंकि कंपनी पर करीब 57,185 करोड़ रुपये का ऋण था। पिछले साल नवंबर में ऋणदातोँ की समिति ने अदाणी समूह की योजना को मंजूरी दी थी।

अदाणी एंटरप्राइजेज को ऋणदाताओं के 89 प्रतिशत वोट मिले, जबकि अन्य दावेदारों में डालमिया सीमेंट और वेदांता समूह शामिल थे।

ऋणदाताओं की समिति (सीओसी) ने अपने फैसले का बचाव करते हुए कहा कि बोली का चयन केवल सबसे अधिक कीमत के आधार पर नहीं, बल्कि नकद भुगतान, व्यवहार्यता और समय पर क्रियान्वयन जैसे कई पहलुओं को ध्यान में रखकर किया जाता है।

ऋणदाताओं की समिति ने अदाणी समूह की बोली को इसलिए प्राथमिकता दी क्योंकि इसमें करीब 6,000 करोड़ रुपये तुरंत भुगतान और दो साल में पूरा भुगतान करने का प्रस्ताव था, जबकि वेदांता की योजना में भुगतान की अवधि पांच साल तक थी।

सीओसी ने वेदांता की संशोधित बोली को भी खारिज कर दिया, यह कहते हुए कि वह बोली प्रक्रिया बंद होने के बाद दी गई थी और उसे स्वीकार करने के लिए प्रक्रिया को फिर से शुरू करना पड़ता।

एनसीएलटी ने 17 मार्च को अदाणी एंटरप्राइजेज की 14,535 करोड़ रुपये की बोली को मंजूरी दे दी थी, जिसे वेदांता ने एनसीएलएटी में चुनौती दी है।

भाषा योगेश अजय

अजय